धार मुस्लिम समाज ने भोजशाला के सर्वे को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी, याचिका जल्द

मध्य प्रदेश राज्य

धार 

भोजशाला को लेकर एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर धार के मुस्लिम समाज ने एतराज जताया है। उन्होंने इस रिपोर्ट को चुनौती देने के लिए अलग से एक याचिका दायर करने की तैयारी की है। उनका कहना है कि सर्वे के यह निष्कर्ष गलत हैं, जिनमें यह कहा गया है कि कमल मौला मस्जिद का निर्माण एक प्राचीन हिंदू मंदिर के अवशेषों का उपयोग करके किया गया था। 

मुस्लिम पक्ष ने 1903 के ब्रिटिश काल के एक एएसआई सर्वेक्षण का हवाला भी दिया है, जिसमें इस स्थल को कमल मौला मस्जिद के रूप में दर्ज किया गया था और इसे एक संरक्षित स्मारक घोषित किया गया था। उन्होंने कहा कि यह एक मस्जिद थी, यह एक मस्जिद है और वहां नमाज जारी रहेगी। उनके अनुसार, मस्जिद का निर्माण निजामुद्दीन औलिया के खलीफा कमाल मौलाना द्वारा किया गया था, जो इस्लाम के प्रचार के लिए 1295 में धार आए थे और उन्हें मालवा शासक महमूद खिलजी द्वारा भूमि प्रदान की गई थी।

उस भूमि पर मदरसे और मस्जिदें स्थापित की गई थीं। इसके लिए राजा भोज के महल के अवशेषों का इस्तेमाल किया गया, क्योंकि भारी सामग्री का परिवहन कठिन था, इसलिए निर्माताओं ने पास के राजा भोज के महल के पत्थरों का उपयोग किया।

उनका दावा है कि राजा भोज का महल चालुक्य-सोलंकी राजवंश के शासकों ने तोड़ा था और उन्हीं पत्थरों का इस्तेमाल यहां हुआ है। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर दावे, आपत्तियां व सुझाव देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।

हिंदू संगठनों का दावा- सर्वे में मिले मंदिर होने के प्रमाण हिंदू संगठनों ने बताया कि एएसआई द्वारा कोर्ट में पेश की गई सर्वे रिपोर्ट की प्रति दोनों पक्षों को दे दी गई है। रिपोर्ट के आधार पर दावा किया गया है कि परिसर में सर्वे के दौरान मिले स्तंभ, शिलालेख, मूर्तियां और अन्य अवशेष स्पष्ट रूप से हिंदू संस्कृति के प्रतीक हैं। संगठनों का कहना है कि जमीन के भीतर खुदाई में जो मूर्तियां और संरचनात्मक अवशेष मिले हैं, वे इस बात के ठोस प्रमाण हैं कि यहां प्राचीन काल में मंदिर स्थापित था।

मुस्लिम पक्ष बोला- 1904 के सर्वे में तय हुआ था कि यह मस्जिद है दूसरी ओर, मुस्लिम समाज के सदर अब्दुल समद ने सर्वे रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि हम शुरू से ही इस सर्वे को लेकर ऑब्जेक्शन लेते आ रहे हैं। 1903 और 1904 में एएसआई के ही सर्वे में यह स्पष्ट रूप से तय किया गया था कि यह स्थान मस्जिद है और उसकी संरचना भी मस्जिद जैसी ही है। उन्होंने कहा कि अब नए सर्वे रिपोर्ट में कई तथ्य बदले हुए नजर आ रहे हैं। इन्हीं बदलावों को लेकर वे कोर्ट में 15 दिन के भीतर विधिवत अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे।

'2003 के बाद चीजें बदली गईं, रिपोर्ट में मस्जिद का भी जिक्र' सदर अब्दुल समद ने दावा किया कि 2003 के बाद से परिसर में कई चीजें बदली गई हैं, जिन्हें अब सर्वे के नाम पर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे शुरू से इसका विरोध करते आ रहे हैं और आगे भी करेंगे। समद ने यह भी दावा किया कि नई सर्वे रिपोर्ट में भी इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह स्थान मस्जिद है।

16 मार्च को होगी मामले की अगली सुनवाई हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्धारित समय सीमा में अपने दावे, आपत्तियां और सुझाव पेश करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च 2026 को होगी। इस सुनवाई में सर्वे रिपोर्ट के प्रत्येक बिंदु पर विस्तृत बहस होने की संभावना है। भोजशाला मामले को लेकर धार सहित पूरे प्रदेश में चर्चाओं का दौर जारी है।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry