राजधानी का नाम बदलेगा? बीजेपी सांसद की मांग से छिड़ी नई बहस

राज्य

नई दिल्ली
केरल का नाम बदलकर केरलम किए जाने के फैसले पर केंद्र सरकार की मुहर लगने के बाद अब दिल्ली की नई पहचान की मांग भी उठ गई है। भाजपा के सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने दिल्ली का नाम बदलकर 'इंद्रप्रस्थ' करने की मांग की है। उन्होंने इसके लिए गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को लेटर लिखकर अपनी दलीलें पेश की हैं।

दिल्ली के चांदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने पर विचार करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि ऐसा कदम भारत की राजधानी की ऐतिहासिक और सभ्यतागत पहचान को पुनर्स्थापित करेगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दिल्ली में किसी स्थान पर,संभवतः पुराना किला में पांडवों की प्रतिमाएं स्थापित की जाएं, जिससे दिल्ली की प्राचीन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित किया जा सके।

विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने का सुझाव
खंडेलवाल ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी लेटर लिखा है और उनसे अनुरोध किया है कि दिल्ली विधानसभा में दिल्ली का नाम 'इंद्रप्रस्थ' करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे एक लेटर में खंडेलवाल ने कहा कि भारत विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है और उसकी राष्ट्रीय राजधानी का नाम भी उसके गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

और क्या दलीलें
खंडेलवाल ने कहा कि ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और दीर्घकालिक सभ्यतागत परंपराएं यह स्थापित करती हैं कि वर्तमान दिल्ली ही प्राचीन इंद्रप्रस्थ का स्थल है, जो पांडवों द्वारा स्थापित भव्य राजधानी थी, जैसा कि महाकाव्य महाभारत में वर्णित है। महाभारत में इंद्रप्रस्थ को यमुना नदी के तट पर बसा एक समृद्ध और भव्य नगर बताया गया है, जो आज की दिल्ली के भौगोलिक स्वरूप से पूरी तरह मेल खाता है।

उन्होंने आगे बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा पुराना किला में की गई खुदाई में लगभग 1000 ईसा पूर्व के प्राचीन बसावट के प्रमाण मिले हैं, जिनमें पेंटेड ग्रे वेयर (PGW) संस्कृति के अवशेष भी शामिल हैं, जिन्हें महाभारत काल से जोड़ा जाता है। उनके अनुसार ये खोजें इस ऐतिहासिक धारणा को मजबूत करती हैं कि प्राचीन इंद्रप्रस्थ इसी स्थान पर स्थित था जहां आज दिल्ली है। खंडेलवाल ने कहा कि 'दिल्ली' नाम अपेक्षाकृत बाद के मध्यकालीन दौर में प्रचलन में आया, जिसे इतिहासकार ढिल्लिका या देहली जैसे नामों से जोड़ते हैं। लेकिन यह इसकी मूल और प्राचीन सभ्यतागत पहचान का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

सांसद ने बताया क्या होगा फायदा
खंडेलवाल ने कहा, 'इंद्रप्रस्थ राजधानी की मूल सभ्यतागत पहचान का प्रतीक है, जबकि दिल्ली इतिहास के एक बाद के चरण को दर्शाता है। राजधानी का नाम इंद्रप्रस्थ करना भारत की प्राचीन विरासत से उसके संबंध को पुनर्स्थापित करेगा और भारत की सांस्कृतिक निरंतरता को मजबूत करेगा।' खंडेलवाल ने यह भी कहा कि भारत में कई शहरों के ऐतिहासिक नाम पुनर्स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और प्रयागराज प्रमुख उदाहरण हैं।

उन्होंने कहा कि इंद्रप्रस्थ नाम पहले से ही दिल्ली के कई प्रमुख संस्थानों और स्थानों में प्रचलित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस ऐतिहासिक नाम को समाज में स्वाभाविक स्वीकृति प्राप्त है। खंडेलवाल ने कहा कि दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ करना भारत की राजधानी की सभ्यतागत पहचान को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा, जिससे राष्ट्रीय गौरव मजबूत होगा और विश्व के सामने भारत की प्राचीन विरासत और भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत होगी।

औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग
उन्होंने गृह मंत्री श्री अमित शाह से आग्रह किया कि इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और अन्य विशेषज्ञों से परामर्श कर इस प्रस्ताव पर औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाए। खंडेलवाल ने कहा, 'यह कदम न केवल एक ऐतिहासिक विसंगति को दूर करेगा, बल्कि भारत की महान सभ्यता की विरासत को सम्मान देने और उसे संरक्षित रखने की हमारी प्रतिबद्धता को भी सशक्त करेगा।'

 

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