बेंगलुरु
कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद का नाटक अभी खत्म नहीं हुआ है। वहां लंबे समय से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार को सीएम बनाने को लेकिर सियासी रस्साकसी जारी है। अब इस नाटक में तीसरे किरदार की एंट्री हुई है। कर्नाटक के गृहमंत्री जी. परमेश्वर के समर्थकों ने तुमकुरु में उनके सामने ही उनके समर्थन में राज्य के 'अगले मुख्यमंत्री' के नारे लगाए लेकिन बड़ी बात यह है कि परमेश्वर ने समर्थकों द्वारा लगाए गए राज्य के 'अगले मुख्यमंत्री' नारों से खुद को अलग कर लिया है।
परमेश्वर ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि वह इस पद के लिए अटकलों को हवा नहीं देंगे और ना ही पैरवी करेंगे क्योंकि कोई भी निर्णय पार्टी के आला कमान का है। परमेश्वर ने बेंगलुरु में पत्रकारों से कहा कि उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए नारों में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने दोहराया कि नेतृत्व संबंधी निर्णय उचित समय पर पार्टी नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहता कि और कोई भ्रम उत्पन्न हो। हमारा आलाकमान उचित समय पर निर्णय लेगा।”
मैं कोई पैरवी नहीं करूंगा
मंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा कथित पैरवी के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा, "मैं कोई पैरवी नहीं करूंगा। कल मैंने जो कहा क्या आपने वह नहीं सुना? किसी ने मुझसे पूछा कि क्या मैं दिल्ली जा रहा हूं। मैं दिल्ली नहीं गया। बस इतना ही।" उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे निर्णय कांग्रेस के आलाकमान पर छोड़ दिए जाते हैं। परमेश्वर ने कहा कि शुभचिंतक अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकते हैं लेकिन उन्होंने उन्हें ऐसा करने से हतोत्साहित किया है।
मैं इस भ्रम में शामिल नहीं होऊंगा
उन्होंने कहा, "हो सकता है कि हमारे शुभचिंतक यहां अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हों। मैं उन्हें ऐसा करने से कैसे मना कर सकता हूं? मैंने उन्हें ऐसा ना करने के लिए कहा है… लेकिन जैसा कि मैंने कहा, मैं इस भ्रम में शामिल नहीं होऊंगा और न ही इसे बढ़ावा दूंगा।" कर्नाटक के गृह मंत्री ने लापता बच्चों के मामलों के संबंध में कहा कि सरकार इसे गंभीरता से ले रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी देश में रह रहे विदेशियों का पता लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।
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