‘द केरल स्टोरी 2’ का बैन हटा, हाईकोर्ट ने दिया रिलीज का आदेश

मनोरंजन

मुंबई 
फिल्म 'द केरल स्टोरी 2' के मेकर्स के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. केरल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने फिल्म की रिलीज पर लगी अंतरिम रोक को पूरी तरह से हटा दिया है.  डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता और सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अब फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करने का रास्ता साफ कर दिया है. 

इससे पहले सिंगल जज की बेंच ने फिल्म के कंटेंट और सांप्रदायिक सौहार्द पर पड़ने वाले इसके असर को लेकर चिंता जताते हुए 15 दिनों का स्टे लगा दिया था.  सिंगल-जज ने फिल्म की रिलीज को चुनौती देने वाली दो पिटीशन पर अपना ऑर्डर दिया था, उनका कहना था कि फिल्म केरल को गलत तरीके से दिखाती है और इससे सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है.

केरल हाई कोर्ट ने पलटा फैसला
जस्टिस थॉमस ने गुरुवार, 26 फरवरी को दोपहर 3 बजे फिल्म की रिलीज पर 15 दिनों के लिए रोक लगा दी थी, साथ ही सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से फिल्म के खिलाफ रिप्रेजेंटेशन की जांच करने को कहा था. डिवीजन बेंच ने उसी दिन शाम 7.30 बजे फिल्म के प्रोड्यूसर्स द्वारा फाइल की गई अपील पर सुनवाई के लिए एक अर्जेंट स्पेशल सिटिंग बुलाई. दो घंटे से ज्यादा चली डिटेल्ड सुनवाई के बाद, बेंच ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

अब आज यानी 27 फरवरी शाम 4 बजे जस्टिस एसए धर्माधिकारी और पीवी बालकृष्णन की डिवीजन बेंच ने जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें फिल्‍म की रिलीज पर 15 दिनों के लिए रोक लगाई गई थी.

आज ही रिलीज होगी फिल्म!
केरल हाई कोर्ट का यह आदेश ठीक उसी दिन आया है जिस दिन फिल्म को रिलीज होना था. सुबह तक जहां टिकटों के पैसे रिफंड किए जा रहे थे और सिनेमाघर मालिक असमंजस में थे, वहीं दोपहर तक स्थिति पूरी तरह बदल गई. खबर ये भी थी कि शुक्रवार को उन ऑडियंस के पैसे वापस कर दिए गए जिन्होंने फिल्म की एडवांस बुकिंग कराई थी, हालांकि अब डिवीजन बेंच के फैसले के बाद फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो गया है.
 
फिल्म की रिलीज पर क्यों लगी थी रोक?
इससे पहले गुरुवार को जस्टिस थॉमस ने फिल्म पर रोक लगाते हुए काफी सख्त रुख अपनाया था. कोर्ट का मानना था कि सेंसर बोर्ड (CBFC) ने इस फिल्म को सर्टिफिकेट देते समय कानूनी बारीकियों का ठीक से पालन नहीं किया है. जज ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि फिल्म में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और किसी खास समुदाय को बदनाम करने वाली सामग्री हो सकती है. कोर्ट ने टीजर को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि बिना उच्चाधिकारियों की उचित जांच के इसे रिलीज करना कानूनन सही नहीं होगा.

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