टीईटी 2018 के अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, नियुक्ति की याचिका 7 साल बाद खारिज

मध्य प्रदेश राज्य

जबलपुर 

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2018 उत्तीर्ण दो महिला अभ्यर्थियों की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि याचिकाकर्ताओं ने सात वर्षों से अधिक समय तक कोई सक्रिय प्रयास नहीं किया। 

कटनी निवासी सरस्वती पाटीदार और नरसिंहपुर की रेणुका यादव ने याचिका दायर कर बताया था कि उन्होंने वर्ष 2018 में टीईटी उत्तीर्ण की थी। उनका कहना था कि प्रदेश में मिडिल स्कूल शिक्षकों के पद रिक्त हैं और वर्ष 2024 में नई नियुक्तियों के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। ऐसे में उन्हें वर्ष 2018 के नियमों के तहत नियुक्ति देने के निर्देश राज्य सरकार को दिए जाएं।

सरकारी अधिवक्ता ने रखा सरकार का पक्ष

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने की। शासन की ओर से अधिवक्ता अनुभव जैन ने तर्क दिया कि वर्ष 2022 में जारी आम सूचना में सभी इच्छुक अभ्यर्थियों को प्रचलित नियमों के अनुसार आवेदन करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने आवेदन नहीं किया। अब नई चयन प्रक्रिया लागू हो चुकी है और नियमों में संशोधन हो चुका है, इसलिए पुराने नियमों के आधार पर नियुक्ति की मांग विधिसम्मत नहीं है।

कोर्ट बोला-अधिकार का दावा स्वीकार नहीं

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं ने 7 वर्षों तक नौकरी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। 29 सितंबर 2022 की सार्वजनिक सूचना के समय भी उन्होंने आवेदन नहीं किया। नियमों में संशोधन के बाद नई चयन प्रक्रिया प्रभावी हो चुकी है। ऐसे में विलंब के बाद अधिकार का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।

डिवीजन बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में समय सीमा और सक्रियता अत्यंत महत्वपूर्ण है। लंबी चुप्पी के बाद नियुक्ति का दावा न्यायोचित नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर दोनों याचिकाएं खारिज कर दी गईं।

 

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