नई दिल्ली
हाल ही में सोशल मीडिया पर ट्रैफिक पुलिसकर्मी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो बाइक पर महिला राइडर देखकर उसे छोड़ देता है. इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही थी कि क्या पुरुष पुलिसकर्मी किसी महिला राइडर को रोक सकते हैं या नहीं. इस सवाल पर कई तरह के कमेंट आ रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि शाम को पुलिसकर्मी नहीं पकड़ सकते हैं तो कई लोगों का कहना है कि शराब वाला टेस्ट पुरुष पुलिसकर्मी नहीं कर सकते हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर सच्चाई क्या है…
क्या कहते हैं नियम?
नियमों के अनुसार, भारतीय ट्रैफिक कानून पुरुष पुलिसकर्मियों को दस्तावेज़ जांच या उल्लंघन के लिए गाड़ी चला रही महिलाओं को रोकने की अनुमति देते हैं. सभी राज्यों में पुलिस के निर्देश पुरुष और महिलाओं के लिए एक ही है. ये बात सच है कि सूर्यास्त के बाद महिला अधिकारियों की तैनाती अनिवार्य है, लेकिन ये नियन केवल गिरफ्तारी या हिरासत के मामलों में ही लागू होते हैं.
ऐसे में सामान्य यातायात जांच के मामलों में ये लागू नहीं होते हैं. ऐसे में रात में भी पुरुष पुलिसकर्मी महिला चालकों से पूछताछ कर सकते हैं. सरल शब्दों में कहें तो, किसी वाहन को रोकना, कागजात की जांच करना या चालान जारी करना गिरफ्तारी नहीं माना जाता है.
इसके अलावा, एएसआई या उससे ऊपर के रैंक के ट्रैफिक ऑफिसर चालक के लिंग की परवाह किए बिना, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन के कागजात मांगने या चालान जारी करने के लिए अधिकृत हैं. रात के समय में कई राज्य सुरक्षा और जनता की सुविधा के लिए, जहां तक संभव हो, महिला अधिकारियों को तैनात करना पसंद करते हैं. लेकिन यह एक प्रथा है, कानून नहीं. पुरुष पुलिस अधिकारियों पर अभी भी रात के अंधेरे में महिला चालकों को रोकने पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है.
साल 2015 में, नवी मुंबई पुलिस ने गोल्फ क्लब रोड पर लापरवाही से गाड़ी चलाने सहित यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाली महिला चालकों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया. महिला कांस्टेबलों की कम संख्या के कारण, पुरुष अधिकारियों ने जुर्माना लगाया. कानून पुरुषों और महिलाओं में कोई भेद नहीं करता.
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