रायबरेली
आधुनिक रेलडिब्बा कारखाना (आरेडिका) में बन रही वंदे भारत ट्रेन बनकर तैयार है, अब इसका ट्रायल किया जा रहा है। इसका पहला गति परीक्षण सफल रहा है। महाप्रबंधक ने स्वयं इंजन में बैठकर परीक्षण को परखा। आरेडिका अधिकारियों के अनुसार यह प्रक्रिया पूरी होने में अभी दो सप्ताह का समय लग सकता है। होली के पहले वंदे भारत के आरेडिका से निकलने की उम्मीद है।
वंदे भारत ट्रेन के 16 डिब्बों की रैक को बनाने का काम आरेडिका को मिला था। पहले दौर में आरेडिका की अधिकारियों की टीम जानकारी जुटाने के लिए आइसीएफ चेन्नई गई थी। वहां से टीम के आने के बाद निर्माण का काम शुरू हो सका। अब वंदे भारत ट्रेन बनकर तैयार है। उसके ट्रायल की प्रक्रिया चल रही है।
एक लघु ट्रायल रन में ट्रैक्शन, गति व ओवरहेड इक्विपमेंट से लिए गए करंट जैसे प्रमुख परीक्षण मानकों का अवलोकन किया गया। ट्रायल शेड से प्रारंभिक संचालन के दौरान रैक की गति को 10 किलोमीटर प्रति घंटा की निर्धारित गति पर परीक्षण किया गया। ब्रेक प्रतिक्रिया, पैसेंजर एनाउंसमेंट एवं पब्लिक इंफार्मेशन सिस्टम की कार्यप्रणाली व ट्रैक्शन के दौरान प्रणाली के व्यवहार का भी परीक्षण किया गया।
महाप्रबंधक प्रशांत कुमार मिश्र ने कहा कि यह उपलब्धि एमसीएफ व उसके उद्योग सहयोगियों के बीच सुदृढ़ समन्वय व सहयोग का प्रतीक है जो वंदे भारत परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 12 फरवरी को आयोजित ट्रायल पूर्व निरीक्षण के दौरान मेसर्स सीमेंस के जर्मन अभियंता क्रिस्टोफ गोएट्ज, सैंड्रा स्पोंसेट व सेबास्टियन शोएसर, पदमाकर डीके, सैत करकृ ने तकनीकी कार्रवाई में सक्रिय सहभागिता की थी। उन्हाेंने बताया कि यह ट्रायल एमसीएफ की अत्याधुनिक, उच्च गति वाली ट्रेनसेट के निर्माण के लिए उसकी प्रतिबद्धता, नवाचार क्षमता व उत्कृष्टता के प्रति समर्पण को स्थापित करता है।
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