भोपाल
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के न्यू मार्केट के एक रेस्टोरेंट में शुक्रवार को 'अखिल भारतीय राज्य चतुर्थ श्रेणी सरकारी कर्मचारी महासंघ' की राष्ट्रीय बैठक संपन्न हुई। बैठक में देश के लगभग सभी राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और कर्मचारियों की उपेक्षा के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का शंखनाद किया।
1.44 करोड़ रिक्त पदों पर भर्ती और 8वें वेतनमान की मांग
महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री एवं लघु वेतन कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र शर्मा ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती लंबे समय से बंद है, जिसके कारण लगभग 1 करोड़ 44 लाख पद रिक्त पड़े हैं। बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि इन पदों पर नियमित भर्ती शुरू की जाए। साथ ही, केंद्र के समान राज्यों में भी आठवां वेतनमान लागू करने और पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग की गई।
आउटसोर्सिंग बंद हो, आयोग का हो गठन
कर्मचारी नेताओं ने आउटसोर्सिंग प्रथा पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे पूरी तरह बंद करने की मांग की। प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि जो कर्मचारी वर्तमान में आउटसोर्स पर कार्यरत हैं, उनके लिए 'आउटसोर्स आयोग' का गठन किया जाए और उन्हें नियमित करने के नियम बनाए जाएं। इसके अतिरिक्त, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, कोटवार, और आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं को कम से कम 30,000 रुपये का मासिक वेतन देने की मांग भी उठाई गई।
17 मार्च को दिल्ली में महासंग्राम
बैठक में निर्णय लिया गया कि अपनी मांगों को लेकर 17 मार्च को देशभर के 'डी ग्रुप' कर्मचारी दिल्ली के रामलीला मैदान में एकत्रित होंगे। यहां एक विशाल रैली और आमसभा आयोजित की जाएगी, जिसके पश्चात केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
देशभर से जुटे प्रतिनिधि
बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के गणेशन. रामनारायण मीणा, बीके मधुराम, बीएम नटराजन, रामचंद्र गुप्ता, अरुण बावरिया, सुजान बिंदु, रणजीत सिंह राणा, ऋतिक बारी, वेंकट और गोविंद सिंह नेगी उपस्थित रहे। कई राज्यों के प्रतिनिधि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भीजुड़े। स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजय दुबे, राष्ट्रीय सहायक महासचिव सुधीर भार्गव और जिला अध्यक्ष राम कुंडल सेन विचार रखे।
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