प्राथमिक वा माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को नही है बात करने की तजुर्बा मुंह से निकालते आग

मध्य प्रदेश राज्य

प्राथमिक वा माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों को नही है बात करने की तजुर्बा मुंह से निकालते आग 

राजेंद्रग्राम 
कार्यालय विकासखंड पुष्पराजगढ़ अंतर्गत आने वाली एकीकृत माध्यमिक विद्यालय नगमला वा शासकीय प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों के द्वारा किसी संस्था से आए हुए अधिकारी कर्मचारी वा पत्रकारो के आने से सिक्षको में खलबली मच जाती है।और सभी शिक्षक एक जगह आए हुए अधिकारी कर्मचारी वा पत्रकार बंधुओ को घेर कर उसका इंटरव्यू लेने के कगार में होते है।कहा जाता है की आप लोगों से हमारा कोई लगाओ नही है क्यू आए और किस लिए आए हो शिक्षकों का इंटरव्यू पत्रकारों को लेने की बजाय पत्रकारों का इंटरव्यू शिक्षकों के द्वारा लिया जाता है।और कहा तो जितना प्रधाना ध्यापक का अधिकार नही होता है उससे कई ज्यादा अधिकार दो दिनों का मेहमान अतिथि शिक्षको को बोलने का अधिकार दिया जाता है।और अतिथि शिक्षको के पास इतना भी तजुर्बा नही होता की को कोई परिचय पूछते है तो उनका नाम पूछने से नाम वा परिचय नही बताया जाता है क्या शिक्षा विभाग के द्वारा यही संस्कार विद्यार्थियों को दिलाए जाने की सलाह अपने शिक्षा कर्मियों  को सिखाया जाता है और अगर ऐसे शिक्षको को आने वाले टाइम में भर्ती करेगी सरकार तो विद्यार्थियों का उज्वल भविष्य क्या कभी साकार हो सकेगी।

अतिथि शिक्षक के द्वारा बनाया गया वीडियो रिकॉर्डिंग

एकीकृत माध्यमिक विद्यालय नगमला के अतिथि शिक्षक को नाम पूछने पर नाम नही बताया गया और अपने मोबाइल का कैमरा चालू कर वीडियो बनाने में लग जाते है अगर बच्चो से कोई उनके ही किताब से कोई प्रश्न पूंछ लिया जाता है तो बच्चे उस प्रश्न का जवाब नही दे पाते है अगर वीडियो बनाने की जगह विद्यार्थियों को पढ़ाया लिखाया जाता तो सही तरीके से विद्यार्थियों अपना शिक्षा ग्रहण कर पाते और कभी कोई भी प्रश्न पूछने पर सही सही जवाब जरूर दे पाते ना की सिर नीचे कर लिया करते और सभी विभागों से अच्छा शिक्षा विभाग को माना गया है,जहां शिक्षा मिलती है ,लेकिन ऐसे शिक्षको के द्वारा शिक्षा विभाग वा अच्छा शिक्षा  कर्मचारियों को बदनाम करने के लिए तुले बैठे हैं।और सासन प्रशासन को भी बदनाम किया जाता है।

समय से नही खुलता है, विद्यालय नही आते शिक्षक

जानकारी के अनुसार बताया गया की शिक्षक अपने मनमानी से विद्यालय खोलते है और मनमानी से बंद किया जाता है और समय से विद्यालय में उपस्थित ही नही होते है और सौचालय मेंशिक्षको के द्वारा ताला लगाकर विद्यार्थियों को सौच के लिए नदी तालाब में भेजने के लिए मजबूर किया जाता है ,और बच्चों को डांट फटकार व प्रताड़ित भी किया जाता है।ग्रामीणों का कहना है की उचित व्यवस्था कराकर विद्यार्थियों की उज्ज्वल भविष्य की कामना करते है।

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