प्रियांशी ने अल्बानिया में रेसलिंग में रजत पदक जीता, वतन वापस लौटीं, उज्जैन की बेटी ने मचाया धमाल

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उज्जैन

धार्मिक नगरी उज्जैन की बेटी प्रियांशी प्रजापत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने अल्बानिया के तिराना शहर में आयोजित सीनियर वर्ल्ड रैंकिंग रेसलिंग टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 50 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक हासिल किया। प्रियांशी की इस उपलब्धि से देश के साथ उज्जैन भी गौरवान्वित हुआ है। 

जानकारी के अनुसार प्रियांशी को 26 तारीख को यह पदक मिला था। खिलाड़ियों की भारत वापसी 1 तारीख को तय थी, लेकिन मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव के कारण फ्लाइट रद्द हो गई, जिससे टीम की वापसी में परेशानी आ गई थी।

प्रियांशी के पिता मुकेश प्रजापत ने बताया कि जैसे ही यह जानकारी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंची, उन्होंने तुरंत संज्ञान लिया और खिलाड़ियों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास शुरू किए। मुख्यमंत्री ने स्वयं परिवार से संपर्क कर स्थिति की जानकारी ली और केंद्र सरकार से समन्वय कर खिलाड़ियों की स्वदेश वापसी सुनिश्चित कराई।

मुकेश प्रजापत के अनुसार उनकी बेटी अब दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच चुकी है और जल्द ही उज्जैन आएगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री भी दिल्ली में पूरी टीम से मुलाकात करेंगे।

प्रियांशी के पिता ने बताया कि यह उनका पहला सीनियर वर्ल्ड रैंकिंग टूर्नामेंट था। इसमें उन्होंने ओलंपियन पहलवानों को कड़ी टक्कर देते हुए फाइनल तक का सफर तय किया और रजत पदक अपने नाम किया। इससे पहले भी प्रियांशी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं। उन्होंने वियतनाम में आयोजित अंडर-23 एशियन चैंपियनशिप में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था।
 
    अल्बानिया के तिराना शहर में आयोजित वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप रैंकिंग सीरीज़ में शामिल सभी भारतीय खिलाड़ी सुरक्षित वापस आ रहे हैं। मध्यप्रदेश की बेटी प्रियांशी प्रजापत भी आज सुरक्षित स्वदेश लौट रही हैं। बिटिया ने चैंपियनशिप में रजत पदक जीता है। 

मुकेश प्रजापत ने कहा कि उनकी बेटी की इस सफलता के पीछे वर्षों की कड़ी मेहनत और त्याग है। खेल के कारण वह कई त्योहारों और पारिवारिक कार्यक्रमों से दूर रही, लेकिन देश के लिए पदक जीतना ही उसका लक्ष्य रहा। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि उनके प्रयासों से ही बेटी और अन्य खिलाड़ी सुरक्षित स्वदेश लौट सके हैं। प्रियांशी की इस उपलब्धि से उज्जैन में खुशी का माहौल है और लोग इसे शहर के लिए गर्व का क्षण मान रहे हैं।

 

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