बहुमत की ओर बालेन शाह की RSP, ‘सुनामी’ में उड़े नेपाल के कई दिग्गज

दुनिया

नई दिल्ली.

नेपाल के संसदीय चुनाव की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने दक्षिण एशिया की राजनीति को स्तब्ध कर दिया है। 150 निर्वाचन क्षेत्रों में जारी मतगणना में रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली RSP ने अभूतपूर्व बढ़त बना ली है। नेपाल की युवा पीढ़ी ने पारंपरिक पार्टियों नेपाली कांग्रेस (NC) और UML को पूरी तरह नकारते हुए बदलाव के पक्ष में वोट दिया है।

275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 108 सीटों पर आगे है। नेपाली कांग्रेस (NC) और CPN-UML 12-12 सीटों पर आगे है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (NCP – संयुक्त मोर्चा) के खाते में फिलहाल सिर्फ 9 सीटें जाती दिख रही हैं। सबसे बड़ी खबर झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से आ रही है, जहां 35 वर्षीय रैपर से नेता बने बालेन शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री और UML अध्यक्ष के.पी. शर्मा ओली पर एक मजबूत बढ़त बना ली है।
के.पी. ओली के अलावा, शेर बहादुर देउबा की कांग्रेस के शेखर कोइराला, अरबपति विनोद चौधरी, विष्णु पौडेल, राजेंद्र लिंगदेन और पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल जैसे दिग्गज अपनी सीटों पर पिछड़ रहे हैं। पुराने नेताओं में केवल पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ही अपनी साख बचाते दिखे हैं। उन्हें पूर्वी रुकुम सीट से विजयी घोषित किया गया है।

RSP की जीत के मायने
भारत सरकार के रणनीतिक गलियारों में इस जीत को बहुत बारीकी से देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत-नेपाल संबंध सीमा विवाद और चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण तनावपूर्ण रहे हैं। बालेन शाह और रवि लामिछाने की जोड़ी को व्यावहारिक और राष्ट्रवादी माना जाता है। भारत यह देखेगा कि क्या बालेन शाह के नेतृत्व में नेपाल अपनी "पड़ोसी पहले" नीति को फिर से संतुलित करेगा या चीन के साथ अपने संबंधों को और गहरा करेगा। नेपाल की संसद की 165 सीटें 'फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट' (प्रत्यक्ष चुनाव) के तहत आती हैं, जिनके परिणाम शनिवार तक स्पष्ट हो जाएंगे। शेष 110 सीटें 'समानुपातिक प्रतिनिधित्व' प्रणाली के माध्यम से भरी जाएंगी, जहां पार्टियों को मिलने वाले कुल वोटों का प्रतिशत उनकी अंतिम ताकत तय करेगा।

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