नई दिल्ली
इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा का कहना है कि यदि ईरान संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने कहा कि एक विस्तारित भू-राजनीतिक संकट वैश्विक आर्थिक गणनाओं को महत्वपूर्ण रूप से बाधित कर सकता है। एक विशेष बातचीत में शर्मा ने कहा कि तेल की कीमतें पहले ही एक छोटे समय में तेजी से बढ़ चुकी हैं। इस संघर्ष से पहले कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे थीं, लेकिन अब यह 90 डॉलर के पार पहुंच चुकी हैं।
ब्रेंट क्रूड का मूल्य 91.84 डॉलर प्रति बैरल
शनिवार को ब्रेंट क्रूड का मूल्य 91.84 डॉलर प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडियएट (डब्ल्यूटीआई) का मूल्य 89.62 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुका था। शर्मा के अनुसार, पहले उम्मीद थी कि संघर्ष कुछ हफ्तों में समाप्त हो जाएगा, लेकिन अब स्थिति अधिक अनिश्चित लग रही है। शर्मा ने बताया कि देश के बजट अनुमानों और रिजर्व बैंक की गणनाएं तेल की कीमतों को लगभग 70 डॉलर या उससे कम मानकर की गई थीं। यदि कीमतें स्थायी रूप से बढ़ती हैं तो नीति निर्माताओं को अपने अनुमानों पर पुनर्विचार करना पड़ेगा।
कीमतों में 10 डॉलर की वृद्धि से बढ़ेगी महंगाई
हालांकि, उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से घरेलू मांग द्वारा संचालित होती है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि पर इस संकट के व्यापक प्रभाव को कम कर सकती है। लेकिन तेल की उच्च कीमतें व्यापार घाटा, चालू खाता घाटा और राजकोषीय घाटा को और बिगाड़ सकती हैं। कच्चे तेल की कीमतों में 10 डॉलर की वृद्धि से खुदरा महंगाई में 0.2-0.4 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
एक दशक पहले भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल की कीमत 145-147 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसी स्थिति फिर से नहीं आएगी। लेकिन यदि संघर्ष बढ़ता है, तो तेल के 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
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