सॉफ्टवेयर कंपनी का दो करोड़ का सालाना पैकेज छोड़कर यशराज किसानों के साथ करेंगे गो संरक्षण

उत्तर प्रदेश राज्य

सीएम योगी के विजन को साकार करने में सहयोग करेगी आईआईटी खड़गपुर के इंजीनियर की स्पेशल टीम

गोबर, गोमूत्र और बायोगैस के जरिए युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार

लखनऊ,

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोसंरक्षण के विजन को अब आधुनिक तकनीक की शक्ति मिलेगी। योगी सरकार ने आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र और उनकी टीम के सहयोग से अब उत्तर प्रदेश की 300 से अधिक गोशालाओं में बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई है। इन प्लांटों के माध्यम से गोबर-गोमूत्र से स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद एवं अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जो ग्रामीण रोजगार का बड़ा जरिया बनेंगे। मुख्यमंत्री के विजन को अब नयी पीढ़ी की तकनीक और युवाओं की ऊर्जा का साथ मिलने से यूपी देश का आधुनिक टेक्नोलॉजी बेस्ड गोसंरक्षण मॉडल वाला राज्य बनने जा रहा है।

युवाओं के लिए आजीविका का बनेगा नया मॉडल
गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पहली बार वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गोसंरक्षण को आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंचगव्य से तैयार उत्पादों को उद्योग से जोड़कर युवाओं के लिए आजीविका का नया मॉडल बनेगा। इस पहल की अगुवाई आईआईटी खड़गपुर के पासआउट छात्र यशराज गुप्ता कर रहे हैं, जिन्होंने शनिवार को जालौन में अपने चार अन्य साथियों के साथ गोसेवा आयोग की टीम से मिलकर गोसंरक्षण पर काम करने की रणनीति बनाई है।

तकनीक के सही उपयोग से गोसंरक्षण बनेगा ग्रामीण आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम
जालौन से इस परियोजना की शुरुआत होने जा रही है। खास बात यह है कि यशराज ने एक प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर कंपनी का दो करोड़ रुपये का सालाना पैकेज छोड़कर गोसेवा से जुड़े इस सामाजिक और पर्यावरणीय मिशन को चुना है। यशराज का कहना है कि गो आधारित अर्थव्यवस्था भारत की परंपरा और स्थायी विकास मॉडल, दोनों से जुड़ी है। अगर तकनीक का सही उपयोग किया जाए तो यह ग्रामीण आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन सकती है।

शुरुआत में जालौन जिले की गोशालाओं में बायोगैस प्लांट्स स्थापित करने की योजना बनाई गई है, जिनसे जैविक खाद, बायो-सीएनजी और बिजली का उत्पादन किया जा सकेगा। सफल प्रयोग के बाद प्रदेश के 300 से अधिक गोआश्रय स्थलों में इसी तकनीक का विस्तार किया जाएगा।

‘पंचगव्य वैल्यू चेन’ के औद्योगिक उपयोग पर देंगे विस्तृत प्रशिक्षण
यशराज और उनकी टीम ने ‘पंचगव्य वैल्यू चेन’ (गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी) के औद्योगिक उपयोग पर विस्तृत प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। गोसेवा आयोग के पदाधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर यह टीम ऐसे उत्पाद तैयार करेगी, जिनकी बाजार में ब्रांडिंग और बिक्री की संभावनाएं मौजूद हैं। आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि योगी सरकार गोसंरक्षण के साथ-साथ उससे जुड़े आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों को भी आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री के विजन के तहत गोआश्रय स्थल अब पशुधन संरक्षण के साथ ऊर्जा और जैविक खाद उत्पादन के केंद्र बनेंगे। इससे गांवों में रोजगार बढ़ेगा और किसान की आमदनी में सीधा इजाफा होगा।

इस मॉडल को प्रदेश भर में लागू करने का लक्ष्य
जालौन से शुरू हो रही यह परियोजना यूपी के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है। स्टार्टअप के माध्यम से आईआईटी खड़गपुर से निकले सॉफ्टवेयर इंजीनियर यशराज और उनकी टीम ने आने वाले समय में इस मॉडल को प्रदेश भर में लागू करने का लक्ष्य बनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि गोसंरक्षण केवल सेवा या परंपरा का विषय नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का आधार बने।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry