इंदौर
शनिवार को पंचकुइया मुक्तिधाम पर अस्थियां गायब होने को लेकर हंगामा हो गया। मुक्तिधाम से एक ही नंबर के टोकन तीन मृतकों के स्वजन को दे दिया गया, उसके चलते यह स्थिति बनी। मदनलाल विश्वकर्मा (55) निवासी गौरी शंकर नगर का शुक्रवार को निधन हुआ था। शनिवार को स्वजन अस्थियां संग्रह के लिए पहुंचे तो उन्हें अस्थियां नहीं मिलीं।
मुक्तिधाम में तैनात कर्मचारियों से पूछताछ की तो उन्होंने रजिस्टर खंगाला। इससे पता चला कि 13 नवंबर वाला टोकन तीन अलग-अलग मृतकों के स्वजन को दे दिया गया था। ऐसे में दूसरा परिवार स्व. विश्वकर्मा की अस्थियां लेकर चला गया। बाद में उस परिवार को फोन लगाया तो वे भी पशोपेश में पड़ गए।
उन्होंने बताया कि टोकन नंबर देखकर वे अस्थि ले गए थे। करीब तीन घंटे बाद वे अस्थियां लेकर लौटे और विश्वकर्मा परिवार को सौंपी। बताया कि वे अस्थि विसर्जन करने निकल गए थे। फोन आने के बाद रास्ते से पलटे और वापस मुक्तिधाम आए।
बिना सोचे उस जगह से अस्थियां लेकर चले गए
सुनील चौबे (65) निवासी नगीन नगर का पांच मार्च को निधन हो गया था। पंचकुइया मुक्तिधाम पर उनका भी अंतिम संस्कार किया था। उनका भी शनिवार को अस्थि संचय था। सुबह बेटे अजय परिवार के साथ मुक्तिधाम पहुंचे और 13 नंबर टोकन दिया तो निगमकर्मियों ने उन्हें संबंधित स्थान से अस्थियां संग्रह करने के लिए कहा। नंबर के अनुसार वे भी बिना सोचे उस जगह से अस्थियां लेकर चले गए।
कर्मचारी से गलती हो गई
परिवार ने कहा कि निगमकर्मियों ने जिस जगह का कहा था, वहीं से अस्थियां संचय की गई हैं। मामले में पंचकुइया मोक्ष विकास समिति के अध्यक्ष वैभव बाहेती ने कहा कि जिस कर्मचारी से गलती हुई है, वह 35 सालों से मुक्तिधाम में सेवाएं दे रहा है। कोरोना जैसे संक्रमण में उसका सबसे अहम योगदान रहा। उसने भूलवश 12 की बजाय 13 नंबर के टोकन दे दिए, जिससे गड़बड़ी हुई। इसके साथ ही कर्मचारी को समझाइश के साथ चेतावनी भी दी है कि आगे ऐसी गलती न हो।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
