वैश्विक तेल संकट की आहट! 1973 जैसी स्थिति बनी तो भारत समेत कई देशों में मचेगा हाहाकार

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नई दिल्ली
यदि आंशिक रूप से भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई रुकी तो संकट कहीं अधिक गहरा होगा। भारत अपनी तेल की जरूरतों का 85 फीसदी हिस्सा आयात करता है। ऐसी स्थिति में उसके लिए भी संकट पैदा होगा और पूरे हालात पर वह लगातार नजर बनाए हुए है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग के चलते दुनिया भर में कच्चे तेल को लेकर दबाव की स्थिति है। हालात ऐसे हैं कि चंद दिनों में ही कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। इसके चलते 1973 जैसे तेल संकट की स्थिति पैदा हो गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई बाधित है और यदि हालात लंबे खिंचे तो फिर बड़ी मंदी की ओर दुनिया बढ़ सकती है। फिलहाल हर दिन 100 मिलियन बैरल की सप्लाई बाधित हो रही है। इस तरह पूरे संकट की वजह एक चेकपॉइंट है। अमेरिकी एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि हर दिन 20 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही होती है। यह दुनिया की कुल खपत का 20 फीसदी है।

इसके अलावा अन्य इलाकों में भी तेल की सप्लाई बाधित हो रही है। होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली तेल की सप्लाई का आधा हिस्सा चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया खरीदते हैं। ऐसी स्थिति में यदि सप्लाई बाधित रहेगी तो सबसे पहले भारत, चीन और साउथ कोरिया जैसे देशों को झटका लगेगा। मार्केट की जानकारी रखने वाली संस्थाओं का कहना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा तो यह तेल सप्लाई की सबसे बड़ी बंदी होगी। ऐसी स्थिति में दुनिया को करारा झटका लगेगा और महामंदी के हालात पैदा हो सकते हैं। इस तरह करीब 20 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई खतरे में होगी।

यही नहीं 1973 के मुकाबले भी यह संकट बड़ा है। तब दुनिया की तेल की जरूरतें कम थीं और आज कहीं ज्यादा हैं। आज के दौर में 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन की खपत होती है, तब 4.5 से 5 मिलियन बैरल तेल ही यहां सप्लाई होता था। इसके अलावा जब ईरानी क्रांति के दौरान बंद होने की नौबत आई थी, तब यहां से सप्लाई का आंकड़ा 6 मिलियन बैरल ही था। ऐसी स्थिति में साफ है कि अबकी बार संकट कहीं अधिक गहरा हो सकता है। इसके अलावा गैस का संकट भी पैदा हो सकता है। साफ कहें तो होर्मुज के ब्लॉक होने पर तेल, गैस समेत सभी जरूरी ईंधन की कमी होगी।

हालांकि एक राहत की बात यह है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश दूसरे रास्तों से सप्लाई जारी रख सकते हैं। ऐसी स्थिति में तेल की सप्लाई तो किसी तरह पहुंचती रहेगी, लेकिन उसकी लागत और कीमत में इजाफा हो जाएगा। इसके अलावा जो ऑइल रिजर्व हैं, वे भी जल्दी ही खत्म हो सकते हैं। यदि आंशिक रूप से भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई रुकी तो संकट कहीं अधिक गहरा होगा। भारत अपनी तेल की जरूरतों का 85 फीसदी हिस्सा आयात करता है। ऐसी स्थिति में उसके लिए भी संकट पैदा होगा और पूरे हालात पर वह लगातार नजर बनाए हुए है।

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