बाढ़ संकट से जूझ रहे मोजाम्बिक की मदद को आगे आया भारत, राहत सामग्री व दवाइयों की सप्लाई

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नई दिल्ली
पूर्वी अफ्रीका के देश मोजाम्बिक के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में आई भीषण बाढ़ का जनजीवन पर बुरा असर पड़ा है। हजारों लोग प्रभावित हुए हैं, और कई इलाकों में राहत एवं पुनर्वास की तत्काल जरूरत महसूस की जा रही है। इस कठिन परिस्थिति में भारत ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर राहत सामग्री भेजी है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने विभिन्न सोशल प्लेटफॉर्म्स पर इसकी सूचना दी है। इसमें बताया है कि अपनी ह्यूमनिटेरियन असिस्टेंस और डिजास्टर रिलीफ (एचएडीआर) कोशिशों के तहत, भारत ने मोजाम्बिक को सहायता सामग्री पहुंचाई है। इस सहायता में 500 मीट्रिक टन चावल, अस्थायी आश्रय के लिए टेंट, हाइजीन किट और पुनर्वास कार्यों में उपयोगी कई अन्य आवश्यक सामान शामिल हैं। इसके अलावा आपदा प्रभावित लोगों की तात्कालिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 10 मीट्रिक टन आवश्यक राहत सामग्री भी भेजी गई है।

राहत अभियान के तहत भारतीय नौसेना के एक जहाज के माध्यम से लगभग 3 टन आवश्यक दवाइयां भी मोजाम्बिक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से निपटने में स्थानीय प्रशासन को मदद मिल सके।
भारत पहले ही समुद्री मार्ग के जरिए 86 मीट्रिक टन जीवन रक्षक दवाइयों की खेप मोजाम्बिक भेज चुका है। इन दवाइयों का उद्देश्य आपदा-प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और पीड़ितों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।

बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं सबसे बड़ी चुनौती बन जाती हैं। ऐसे में भारत द्वारा भेजी गई खाद्य सामग्री, स्वच्छता किट और दवाइयां राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भारत ने हमेशा प्राकृतिक आपदाओं के समय अपने मित्र देशों की सहायता की है। हिंद महासागर क्षेत्र और अफ्रीकी देशों के साथ भारत के मजबूत संबंध रहे हैं, और आपदा के समय दी जाने वाली मानवीय सहायता इन संबंधों को और मजबूत करती है।

भारत मानवीय, चिकित्सीय और लॉजिस्टिक सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पहल के माध्यम से भारत न केवल संकट के समय मदद पहुंचा रहा है, बल्कि हिंद महासागर और अफ्रीका क्षेत्र में एक भरोसेमंद और जिम्मेदार साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है।

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