ग्रामीण क्षेत्रों में आंख-कान-नाक और गला का करेंगे इलाज, बिहार में होगी 1080 नए डॉक्टरों की नियुक्ति

राज्य

पटना.

बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। सात निश्चय-3 (2025-2030) के तहत प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

इसके लिए नेत्र रोग और ईएनटी (कान-नाक-गला) के 1080 विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारियों के अतिरिक्त पद सृजित करने का प्रस्ताव सरकार ने स्वीकृत किया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य के 534 प्रखंड स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ 6 अन्य सीएचसी, यानी कुल 540 केंद्रों में यह व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक केंद्र पर एक नेत्र रोग विशेषज्ञ और एक ईएनटी विशेषज्ञ को तैनात किया जाएगा। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को इन रोगों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को किया जा रहा मजबूत
उल्लेखनीय है कि कि भारतीय लोक स्वास्थ्य मानक (आइपीएचएस) के अनुरूप सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पहले से ही जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ और एनेस्थेटिस्ट के पद सृजित हैं। अब सात निश्चय-3 के तहत स्वास्थ्य सेवाओं के दायरे को बढ़ाते हुए नेत्र रोग और ईएनटी विशेषज्ञों की भी नियुक्ति की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को आंख तथा कान-नाक-गला से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें बेहतर व गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा अपने ही प्रखंड में उपलब्ध हो सकेगी।

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