चंडीगढ़.
पंजाब विधानसभा के चल रहे सत्र में बुधवार को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की संभावित कमी का मुद्दा जोरशोर से उठा। खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने सदन में केंद्र सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश कर कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात और केंद्र की गलत विदेश नीति के कारण देश में ईंधन और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है।
निंदा प्रस्ताव पेश करते हुए मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने कहा कि आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कमी का सीधा असर पंजाब में गेहूं की खरीद प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अगले महीने से राज्य में गेहूं की खरीद शुरू होने वाली है और इसके लिए बड़ी मात्रा में परिवहन की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि इस समय पंजाब के गोदाम पहले से ही भरे हुए हैं और अनाज की ढुलाई में दिक्कत आ रही है। यदि ईंधन की कमी हुई तो नई फसल को रखने में भी बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।
शिक्षामंत्री ने इस मुद्दे को बताया गंभीर
कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि गैस की कमी के कारण नंगल और बठिंडा स्थित उर्वरक संयंत्र बंद हो गए हैं। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो किसानों के लिए यूरिया की कमी पैदा हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब के साथ पक्षपात कर रही है। उनका कहना था कि हरियाणा के पानीपत संयंत्र को पूरी गैस आपूर्ति दी जा रही है, जबकि पंजाब के संयंत्रों को पर्याप्त गैस नहीं मिल रही। इस दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी इस विषय को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस पर विस्तार से चर्चा होना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि निंदा प्रस्ताव पर वीरवार को सदन में विस्तृत बहस करवाई जाए। विधानसभा अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए इसे चर्चा के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
वीरवार को होगी प्रस्ताव पर चर्चा
सत्र के दौरान यह भी मुद्दा उठाया गया कि आने वाले गेहूं खरीद मौसम के लिए राज्य को लगभग पांच लाख जूट बेल की आवश्यकता है। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से केवल तीन लाख बेल उपलब्ध कराने की बात कही गई है। शेष के लिए प्लास्टिक बेल लेने का सुझाव दिया गया है। मंत्रियों ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण पेट्रोलियम आधारित कच्चे पदार्थ की आपूर्ति प्रभावित होती है तो प्लास्टिक बेल की उपलब्धता भी मुश्किल हो सकती है, क्योंकि प्लास्टिक दाना भी पेट्रोलियम पदार्थ से तैयार होता है। सदन में यह भी बताया गया कि बांग्लादेश के साथ संबंध ठीक न होने के कारण जूट की आपूर्ति में भी दिक्कत आ रही है। इससे आने वाले खरीद मौसम में अनाज की पैकिंग और भंडारण की समस्या बढ़ सकती है।
उल्लेखनीय है कि जब यह प्रस्ताव सदन में पेश किया गया, उस समय कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के विधायक सदन में मौजूद नहीं थे। अब इस प्रस्ताव पर वीरवार को विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
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