पटना.
राज्य में बागवानी फसलों को बढ़ावा देने और किसानों को उन्नत तथा रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराने के लिए बिहार सरकार नई पहल कर रही है। कृषि विभाग ने टिश्यू कल्चर लैब स्थापित करने के लिए इच्छुक उद्यमियों और किसानों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। चयनित लाभार्थियों को लैब स्थापना की लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से पौध उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
15 मार्च तक करना होगा ऑनलाइन आवेदन
टिश्यू कल्चर लैब स्थापित करने के इच्छुक आवेदक 15 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। विभाग के अनुसार इस तकनीक से कम समय में बड़ी संख्या में उन्नत और रोगमुक्त पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे मिलने के साथ-साथ उनकी खेती की लागत भी कम होगी।
लैब स्थापना के लिए भूमि की शर्तें तय
लैब स्थापित करने के लिए कम से कम दो एकड़ भूमि होना अनिवार्य है। यह भूमि ऊंची और जलजमाव से मुक्त होनी चाहिए। भूमि आवेदक के नाम पर या न्यूनतम 25 वर्षों की लीज पर होनी चाहिए। इसके साथ ही भूमि का मुख्य सड़क से जुड़ा होना भी जरूरी है ताकि बड़े वाहन आसानी से आ-जा सकें और तैयार उत्पाद को अन्य स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
लैब निर्माण पर करोड़ों रुपये की सब्सिडी
निजी क्षेत्र में टिश्यू कल्चर लैब की प्रति इकाई अधिकतम लागत 4 करोड़ 85 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस पर सरकार 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 2 करोड़ 42 लाख 50 हजार रुपये तक अनुदान देगी। आवेदन के साथ मॉडल प्रोजेक्ट रिपोर्ट और बैंक ऋण से संबंधित सहमति पत्र देना अनिवार्य होगा। इससे राज्य में आधुनिक कृषि और बागवानी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जानें क्या है टिश्यू कल्चर तकनीक
टिश्यू कल्चर एक आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें पौधों के छोटे ऊतक या कोशिकाओं को प्रयोगशाला में विशेष पोषक माध्यम पर विकसित किया जाता है। इस प्रक्रिया से कम समय में बड़ी संख्या में एक जैसे और रोगमुक्त पौधे तैयार किए जा सकते हैं। पारंपरिक बीज या कलम की तुलना में इस तकनीक से तैयार पौधों की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन भी अधिक मिलता है।
केले की खेती में मिल चुकी है बड़ी सफलता
राज्य में टिश्यू कल्चर तकनीक का उपयोग पहले ही कई फसलों में सफल साबित हो चुका है। खासकर केले की खेती में जी-9, मालभोग और चीनिया किस्मों के रोगमुक्त पौधों ने उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इससे किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कृषि विभाग का मानना है कि नई लैब बनने से राज्य में बागवानी क्षेत्र में और तेजी से विकास होगा।
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