जीवाजी विश्वविद्यालय में नकल पर कड़ा शिकंजा, सेवानिवृत्त IAS-IPS अधिकारी के नेतृत्व में उड़नदस्ता की तैनाती

फर्श से अर्श तक

ग्वालियर
 ग्वालियर-चंबल अंचल लंबे समय तक परीक्षाओं में नकल की घटनाओं के लिए बदनाम रहा है। हालांकि स्कूली परीक्षाओं में लगातार सख्ती के कारण नकल पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है, लेकिन विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षाओं में अभी भी नकल के मामले सामने आते रहते हैं।

इस स्थिति से निपटने के लिए जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक अभिनव पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय अब स्नातक परीक्षाओं के दौरान नकल रोकने के लिए सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की सेवाएं लेने जा रहा है। इन अधिकारियों को उड़नदस्तों में शामिल कर परीक्षा केंद्रों की निगरानी कराई जाएगी, जिससे नकल पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

26 मार्च से शुरू होने वाली परीक्षाओं में लागू होगी व्यवस्था
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह नई व्यवस्था 26 मार्च से शुरू होने वाली स्नातक परीक्षाओं में लागू की जाएगी। इसके लिए ग्वालियर-चंबल अंचल में रहने वाले सेवानिवृत्त प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की सूची तैयार कर ली गई है। उनसे अनुमति लेने की प्रक्रिया भी जारी है। विश्वविद्यालय का मानना है कि प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारियों की मौजूदगी से परीक्षा केंद्रों पर अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ेगी।

चार सेवानिवृत्त अधिकारियों ने दी सहमति
अब तक चार सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने उड़नदस्ते में शामिल होने के लिए सहमति दे दी है। इसके अलावा करीब 10 अन्य सेवानिवृत्त प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के नाम भी सूची में शामिल किए गए हैं। आईएएस (सेवानिवृत्त) विनोद शर्मा का कहना है कि उड़नदस्तों में अनुभवी अधिकारियों की मौजूदगी एक सकारात्मक पहल है। इससे न केवल उड़नदस्तों को मजबूती मिलेगी, बल्कि परीक्षा केंद्रों पर सख्ती भी बढ़ेगी और नकल की घटनाओं पर अंकुश लगेगा।

मुरैना और भिंड में बढ़ेगी विशेष सख्ती
विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले के पीछे मुरैना और भिंड जिलों में पहले सामने आती रही नकल की घटनाओं को प्रमुख कारण माना जा रहा है। इन क्षेत्रों में उड़नदस्तों की विशेष निगरानी रखी जाएगी। माना जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर जान-पहचान और मेलजोल के कारण कभी-कभी विश्वविद्यालय के अधिकारी अपेक्षित सख्ती नहीं कर पाते, जिससे नकल की घटनाएं सामने आती हैं। साथ ही सूचनाएं लीक होने का भी खतरा बना रहता है।

कुलसचिव और कुलगुरु ने बताया सकारात्मक कदम
जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजीव मिश्रा के अनुसार उड़नदस्ते में बदलाव का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और कुलगुरु से अनुमति की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारियों की सहायता लेने से परीक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी। वहीं कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने भी इसे सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि इस प्रस्ताव को सहमति दी जाएगी और आगामी परीक्षाओं में इसे लागू किया जाएगा।

 

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry