नई दिल्ली
महिलाओं की 100 मीटर टी35 इवेंट में गोल्ड जीतने के बाद भी 2024 पैरालिंपिक में दो कांस्य पदक जीतने वालीं प्रीति पाल निराश हैं। प्रीति को इस बात का मलाल रह गया कि वह यहां वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पाईं। प्रीति ने कहा कि वह पिछले एक महीने से लगातार प्रैक्टिस कर रही थीं, इसके बावजूद भी उन्होंने वो गलतियां कीं, जो वह प्रैक्टिस में भी नहीं करती हैं। प्रीति ने उम्मीद जताई है कि वह अगली रेस में बेहतर प्रदर्शन करने की पूरी कोशिश करेंगी।
भारतीय पैरा धावक ने बुधवार को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री के पहले दिन 14.46 सेकंड का समय निकालकर टॉप स्थान हासिल किया। हालांकि, प्रीति ने कहा कि रेस के आखिर में थकान की वजह से वह अपना बेस्ट प्रदर्शन नहीं कर सकीं। प्रीति ने ‘आईएएनएस’ को बताया, “यह मेरी 100 मीटर रेस थी। आखिर में मैं थक गई थी और मुझे उस पल इसका एहसास नहीं हुआ। बाद में मैंने रेस फिर से देखी तो मुझे समझ आया।”
गोल्ड मेडल जीतने के बाद भी भारतीय एथलीट ने जोर देकर कहा कि टाइमिंग ज्यादा महत्व रखती है, खासकर जब आगे बड़े टूर्नामेंट होने वाले हों। उन्होंने कहा, “ग्रैंड प्रिक्स में गोल्ड मेडल जीतना सबसे जरूरी बात नहीं है — टाइमिंग ज्यादा मायने रखती है, क्योंकि मेरा असली लक्ष्य एशियन गेम्स और पैरालिंपिक में गोल्ड जीतना है।” रेस का रिव्यू करने के बाद प्रीति ने माना कि कुछ टेक्निकल गलतियां थीं, जो वह ट्रेनिंग के दौरान बहुत कम करती हैं।
उन्होंने कहा, “जब मैंने अपनी रेस का रिव्यू किया और दूसरों ने भी मुझे बताया, तो मुझे एहसास हुआ कि कुछ गलतियां हुई थीं। ये चीजे आमतौर पर ट्रैक पर प्रैक्टिस के दौरान नहीं होतीं, लेकिन यहां ऐसा हुआ। पिछले एक महीने से मैं लगातार पर्सनल बेस्ट टाइमिंग दे रही थी, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ।” निराशा के बावजूद, प्रीति ने कहा कि वह अपनी गलतियों से सीखकर अपने इवेंट में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगी। प्रीति ने बताया, “मैंने गलतियों और सीखों को समझ लिया है और मैं उन्हें कल की 200 मीटर रेस में लागू करूंगी। मैं वहां अपना बेस्ट देने की कोशिश करूंगी। पिछली रेस में मैंने देखा कि मेरा ड्राइव फेज बहुत खराब हो गया था, इसलिए मैं अगली रेस में इसे सुधारने की कोशिश करूंगी।”
प्रीति ने कहा कि उन्हें यहां पर कड़ा मुकाबला नहीं मिला। उन्होंने कहा, “मुझे यहां सच में उस स्तर का मुकाबला नहीं मिला जहां कोई मुझे हरा सके। दूसरों ने भी अपना बेस्ट दिया, लेकिन अगर मेरे पास कोई दूसरा एथलीट होता जो साइड से पुश कर रहा होता, तो शायद मैं खुद को और भी ज्यादा पुश कर पाती। इस वजह से मुझे लगता है कि मैं अपना पूरा ज़ोर नहीं लगा पाई।” प्रीति का मानना है कि कई इंटरनेशनल मीट में हिस्सा लेने से उन्हें एशियन गेम्स और पैरालिंपिक जैसे बड़े इवेंट्स की तैयारी के लिए सुधार की जगहों को पहचानने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, “यह अनुभव हमें सीखने और डर दूर करने में मदद करते हैं। जब तक एशियन गेम्स आएंगे, तब तक हमें प्रेशर से निपटने की ज्यादा आदत हो जाएगी।”
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