रायपुर
वनांचल की किस्मत बदलने वाली फसल साबित हुई इमली
इमली प्रसंस्करण समिति चितापुर की महिला समूह की दीदियों ने अपनी मेहनत और लगन के बूते यह सिद्ध कर दिया है कि यदि ग्रामीण संसाधनों का सही तरीके से प्रसंस्करण किया जाए, तो आर्थिक स्वावलंबन की राह आसान हो जाती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत गठित उत्पादक समूह आजीविका इमली प्रसंस्करण समिति की दीदियों ने इमली के परंपरागत संग्रहण को एक आधुनिक और लाभप्रद व्यवसाय का रूप दे दिया है। समूह की इन महिलाओं द्वारा किए जा रहे इसी उत्कृष्ट और संगठित कार्य को पिछले दिनों राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित लखपति दीदी संवाद कार्यक्रम में विशेष रूप से रेखांकित करते हुए उन्हें मंच पर सम्मानित किया गया।
बस्तर जिले के दरभा विकासखंड अंतर्गत सुदूर ग्राम तुआरास-चितापुर की महिलाओं ने अपनी मेहनत और नवाचार से इमली को वनांचल की किस्मत बदल देने वाली फसल साबित कर दिखाया है। इस समूह की कार्यप्रणाली पूर्णतः पेशेवर और गुणवत्ता पर आधारित है, जहाँ महिलाएँ स्वयं इमली की खरीदी सुनिश्चित करती हैं। खरीदी के उपरांत समूह की सदस्य बड़ी ही कुशलता से इमली का रेशा और बीज निकालकर उसे पूरी तरह शुद्ध करती हैं। महिलाओं के इसी हुनर का परिणाम है कि आज वे साधारण इमली से उच्च गुणवत्ता वाला इमली फूल और विशेष रूप से इमली चपाती तैयार कर रही हैं, जिसकी बाजार में भारी मांग है।
आजीविका इमली प्रसंस्करण समिति चितापुर की सदस्य पदमिनी कश्यप बताती हैं कि अब ग्राहकों की सुविधा और बाजार की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इन उत्पादों की 200 ग्राम, 500 ग्राम और 1000 ग्राम के आकर्षक पैकेटों में पैकेजिंग कर स्वयं इसका विक्रय भी संभाल रही हैं। बिहान योजना के माध्यम से एकजुट होकर इन महिलाओं ने न केवल अपनी आय में वृद्धि की है, बल्कि लखपति दीदी बनने की दिशा में एक सशक्त कदम बढ़ाया है। कार्यक्रम में इन महिलाओं के अटूट परिश्रम और उद्यमशीलता की मुक्त कंठ से सराहना की गई, जो आज पूरे बस्तर संभाग के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी हुई हैं। यह सम्मान दरभा की उन सैकड़ों महिलाओं के सामूहिक प्रयास की जीत है, जो अब आर्थिक रूप से सुदृढ़ होकर समाज की मुख्यधारा में अपना स्थान बना रही हैं।
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