मुख्यमंत्री ने कहा, प्रदेश सरकार के प्रयासों से आज ड्रॉप आउट रेट जीरो पर पहुंच गया

उत्तर प्रदेश राज्य

लखनऊ

 उत्तर प्रदेश में गरीब का बच्चा भी अब वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर से युक्त विद्यालय में पढ़ सकता है। शिक्षा क्षेत्र में सुधारों, ऑपरेशन कायाकल्प और संस्कृत के प्रोत्साहन से यूपी में समृद्धि का नया अध्याय शुरू हुआ है। इसके साथ ही संस्कृत पढ़ने वाले बच्चों के लिए लॉजिंग-फूडिंग की नई स्कीम से प्रदेश और समृद्ध होगा। ये बातें बुधवार को लोकभवन में ‘नव निर्माण के 9 वर्ष’ पुस्तक का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल आवासीय विद्यालय इस नई व्यवस्था के मॉडल हैं और इसी तर्ज पर हर जनपद में सीएम कंपोजिट विद्यालयों का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। पहले चरण में दो-दो विद्यालय गत वर्ष दिए गए थे और इस वर्ष भी दो-दो विद्यालय दिए जाने की तैयारी है। सीएम योगी ने शिक्षा को सुशासन का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि आज जो बदलाव दिखाई दे रहा है, वह योजनाबद्ध तरीके से ठोस क्रियान्वयन का परिणाम है। 

सीएम योगी ने कहा कि एक समय बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में बेटियां नंगे पैर जाती थीं, फटे कपड़ों में पढ़ाई करती थीं और सरकारी यूनिफॉर्म भी मजाक का विषय बन जाती थी। अब स्थिति बदल चुकी है और प्रदेश सरकार 1 करोड़ 60 लाख से अधिक बच्चों को दो-दो यूनिफॉर्म, बैग, पुस्तकें, जूते- मोजे और स्वेटर उपलब्ध करा रही है। 

1,36,000 से अधिक विद्यालयों को संसाधनों से युक्त किया गया

सीएम योगी ने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के संयुक्त प्रयास से 1,36,000 से अधिक विद्यालयों को संसाधनों से युक्त किया गया है। सर्वे और आईटी टूल के इस्तेमाल से यह स्पष्ट हुआ कि बेटियां केवल दूरी की वजह से स्कूल नहीं छोड़तीं, बल्कि शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी भी बड़ी वजह होती है। इसी आधार पर विद्यालयों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय और पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की गई। प्रदेश सरकार के प्रयासों से आज ड्रॉप आउट रेट जीरो पर पहुंच गया है। 

पुराने शिक्षण संस्थानों के पुनरुद्धार की जिम्मेदारी निभाई

मुख्यमंत्री ने नकलविहीन शिक्षा और प्रोजेक्ट अलंकार के जरिए माध्यमिक शिक्षा में भव्य विद्यालय भवनों के निर्माण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हम भी किसी इंटर कॉलेज में पढ़ते थे। आज हमारा भी तो दायित्व है कि उसका पुनरुद्धार करें। सरकार ने पुराने शिक्षण संस्थानों के पुनरुद्धार की जिम्मेदारी निभाई है और शिक्षा व्यवस्था को सम्मान के साथ पुनर्गठित किया है। 

संस्कृत पढ़ने वाले बच्चों के रहने-खाने की समुचित व्यवस्था होगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार संस्कृत पढ़ने वाले बच्चों के लिए छात्रवृत्ति लागू की गई है। चाहे विद्यार्थी छठी कक्षा में हो, पूर्व मध्यमा में हो या आचार्य कक्षा में, हर बच्चे को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जा रही है। संस्कृत पढ़ने वाले बच्चों की लॉजिंग-फूडिंग के लिए नई स्कीम लाई जा रही है, ताकि उनके रहने और खाने की समुचित व्यवस्था हो सके। संस्कृत के माध्यम से प्रदेश समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है, इसलिए सरकार इस दिशा में नई पहल कर रही है।

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