पंजाब पॉलिटिक्स में बड़ा बदलाव: पूर्व अफसरों की एंट्री से समीकरण नए सिरे से तय

राज्य

चंडीगढ़.

पंजाब में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में लंबे समय तक काम करने वाले अधिकारी अब तेजी से सक्रिय राजनीति का रुख कर रहे हैं। कभी सरकारी नीतियों को लागू करने वाले ये नौकरशाह अब विभिन्न राजनीतिक दलों के मंच से उन्हीं नीतियों को बनाने और दिशा देने में भूमिका निभा रहे हैं।

इससे राज्य की राजनीति में अनुभव का नया आयाम जुड़ा है, वहीं निष्पक्षता और नीति निर्माण पर प्रभाव को लेकर बहस भी गहराती जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन अधिकारियों के पास जमीनी अनुभव, प्रशासनिक समझ और सिस्टम की गहरी जानकारी होती है, जिसका लाभ राजनीतिक दल उठाना चाहते हैं। यही कारण है कि लगभग हर प्रमुख दल—चाहे वह आम आदमी पार्टी हो, कांग्रेस, भाजपा या शिअद—पूर्व अधिकारियों को अपने साथ जोड़ रहा है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इससे सेवा के दौरान लिए गए निर्णयों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

पूर्व आईपीएस जो राजनीतिक पार्टियों में शामिल हुए –
कुंवर विजय प्रताप सिंह : आम आदमी पार्टी
मोहम्मद मुस्तफा : कांग्रेस
पीएस गिल : भाजपा
एसएस विर्क : भाजपा
गुरविंदर सिंह ढिल्लों : कांग्रेस

पूर्व आईएएस जो राजनीति में गए –
एसएस चन्नी : भाजपा
परमपाल कौर : भाजपा
डीएस गुरू : अकाली दल
सोम प्रकाश : भाजपा
आरएस कलेर : शिअद
तेजिंदर पाल सिद्धू : शिअद
जगमोहन राजू : भाजपा
डा. अमर सिंह : कांग्रेस
कुलदीप वैद्य : कांग्रेस
बलविंदर सिंह : कांग्रेस

आईएफएस
तरणजीत संधू : भाजपा

पीसीएस
बलकार सिंह : आम आदमी पार्टी

सेवानिवृत जज
जस्टिस निर्मल सिंह : शिअद

राजनीति को प्रशासनिक अनुभव की जरूरत
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह रुझान आने वाले समय में और तेज हो सकता है, क्योंकि दलों को ऐसे चेहरों की जरूरत है जो प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ जनता के मुद्दों की समझ भी रखते हों। फिलहाल, यह साफ है कि सेवा से सियासत तक का यह सफर पंजाब की राजनीति को नई दिशा दे रहा है।

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