आतंकवाद का केंद्र बने पाकिस्तान, सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक सुधार नहीं होगा

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संयुक्त राष्ट्र 
 भारत ने दोहराया है कि सिंधु जल संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक “आतंक का वैश्विक केंद्र” पाकिस्तान अपने तरीकों में सुधार नहीं करता। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने गुरुवार को विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान को “संधियों की पवित्रता बनाए रखने की बात करने से पहले मानव जीवन की पवित्रता का सम्मान करना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “भारत हमेशा एक जिम्मेदार उच्च जलधारा वाला राज्य रहा है लेकिन जिम्मेदारी दोतरफ़ा रास्ता है। पाकिस्तान को अपनी राज्य नीति के उपकरण के रूप में आतंकवाद का उपयोग करना पूरी तरह से छोड़ना होगा।”

हरीश का यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को ऐसा प्रस्तुत किया मानो वह हताहत पक्ष हो, जबकि कार्यक्रम का विषय था सुरक्षित जल और स्वच्छता तक सभी के लिए पहुंच सुनिश्चित करना, जो कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) से जुड़ा है।

हरिश ने कहा, “भारत ने इस संधि पर 1960 में सद्भाव और मित्रता की भावना में हस्ताक्षर किए लेकिन पाकिस्तान ने इस भावना का उल्लंघन करते हुए भारत पर तीन युद्ध और हजारों आतंकी हमले किए।”

उन्होंने कहा, “दसियों हजार निर्दोष भारतीय पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवादी हमलों के शिकार बने।” पिछले साल द रेजिस्टेंस फ्रंट द्वारा पहलगाम में धर्म आधारित आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया।

उन्होंने कहा, “हमारी सहनशीलता और उदारता ने पाकिस्तान के तरीकों को नहीं बदला। अंततः हमें घोषणा करनी पड़ी कि यह संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान, जो आतंकवाद का वैश्विक केंद्र है, सभी प्रकार के आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं करता।”
उन्होंने कहा कि तकनीकी, जनसांख्यिकीय और पारिस्थितिक बदलावों के कारण पिछले 65 वर्षों में क्षेत्र में मौलिक बदलाव हुए हैं, जिसके लिए पाकिस्तान चर्चा करने से इंकार करता रहा।

उन्होंने कहा, “संधि में संशोधन पर पाकिस्तान के साथ हमारी सभी कोशिशें ठुकरा दी गईं।”
कार्यक्रम के विषय पर बोलते हुए, उन्होंने कहा कि इस साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस रविवार को पड़ रहा है और भारत ने सुरक्षित जल और स्वच्छता तक सार्वभौमिक पहुंच के सतत विकास लक्ष्य को उच्च प्राथमिकता दी है।

उन्होंने कहा, “जल जीवन मिशन के माध्यम से भारत ग्रामीण घरों में पाइप से पीने के पानी की आपूर्ति कर दुनिया के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक को लागू कर रहा है।”
2019 में शुरू हुए इस मिशन ने अब तक ग्रामीण घरों के 81.76 प्रतिशत घरों (कुल 1.58 करोड़) तक सुरक्षित नल का पानी पहुंचाया है।

उन्होंने कहा, “सामुदायिक भागीदारी इस प्रयास की आधारशिला है, जिसमें गांव जल समितियां, जिनमें से कई महिलाओं द्वारा नेतृत्व की जाती हैं, स्थानीय जल प्रणालियों की योजना, निगरानी और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।”
उन्होंने जोड़ा, “संयुक्त राष्ट्र में हमारे सामूहिक प्रयास तब सबसे प्रभावी होंगे जब वे ऐसे क्षेत्रों पर केंद्रित हों जो हमें जोड़ते हैं, जैसे कि राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करना, विशेष रूप से विकासशील देशों में, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक सहयोग को आगे बढ़ाना।”

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