राशन कार्ड धारकों को अप्रैल में मिलेगा तिगुना अनाज, सरकार का अहम फैसला

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नई दिल्ली

सरकार गरीबी रेखा के नीचे आने वाले सभी लोगों को मुफ्त में राशन मुहैया कराती है। इस बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के सभी राशन कार्ड धारकों को अप्रैल महीने में तिगुना अनाज देने का ऐलान किया है। केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने इसकी जानकारी दी है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, ‘अप्रैल में सभी लाभार्थियों को तीन महीने (अप्रैल, मई और जून 2026) का राशन एक साथ मिलेगा। इसके लिए सभी लाभार्थी अपनी नजदीकी राशन दुकान से निर्धारित समय पर राशन प्राप्त कर सकते हैं।’ आपको बता दें कि सरकार ने फिलहाल इसके पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया है।

41 लाख फर्जी राशन कार्ड खत्म
इससे पहले सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि वर्ष 2025 में 41.41 लाख अपात्र राशन कार्ड खत्म किए गए। राज्यसभा में खाद्य राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया ने बताया कि हरियाणा में सर्वाधिक लगभग 13.43 लाख राशन कार्ड, राजस्थान में 6.05 लाख, उत्तर प्रदेश में 5.97 लाख, पश्चिम बंगाल में 3.74 लाख और मध्य प्रदेश में 2.60 लाख अपात्र राशन कार्ड खत्म किए गए।

बंभानिया ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में प्रौद्योगिकी के उपयोग के परिणामस्वरूप सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अपात्र राशन कार्डों को खत्म करने में सफलता हासिल की है।

उनके अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 41.41 लाख फर्जी राशन कार्ड खत्म किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या 48.85 लाख और 2023 में 41.99 लाख थी। बंभानिया ने बताया कि पीडीएस में चल रहे सुधारों के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राशन कार्ड और लाभार्थियों के आंकड़ों का पूरी तरह डिजिटलीकरण किया जा चुका है।

देश की लगभग सभी उचित मूल्य की दुकानों (एफपीएस) को खाद्यान्न वितरण के लिए इलेक्ट्रॉनिक ''प्वाइंट ऑफ सेल'' (ईपीओएस) उपकरणों की स्थापना के माध्यम से स्वचालित किया गया है।

इसके अलावा, 99.2 प्रतिशत लाभार्थियों को आधार से जोड़ा जा चुका है और 98.75 प्रतिशत खाद्यान्न वितरण आधार आधारित बायोमेट्रिक सहित डिजिटल प्रमाणीकरण के माध्यम से किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा, "पीडीएस का डिजिटलीकरण दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके और खाद्यान्न की चोरी आदि का समाधान किया जा सके।"

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