92% फेल, 75 हजार पर असर: छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की कुर्सी डगमगाई

छत्तीसगढ़ रायपुर

रायपुर.

शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET 2026) के परिणाम से शिक्षा विभाग और शिक्षकों में उथल-पुथल मची है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद राज्य के सरकारी स्कूलों में वर्षों से सेवाएं दे रहे हजारों शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। अनिवार्य की गई टीईटी के हालिया नतीजों ने विभाग और शिक्षक संगठनों की नींद उड़ा दी है। दरअसल, एक फरवरी 2026 को आयोजित परीक्षा में बगैर टीईटी के लगभग 80 हजार शिक्षकों में केवल आठ प्रतिशत शिक्षक (लगभग पांच हजार) ही सफल हो सके हैं।

लगभग 75 हजार शिक्षक बिना टीईटी योग्यता वाले
वर्तमान में राज्य में लगभग 75 हजार शिक्षक बिना टीईटी योग्यता वाले हैं। टीईटी में प्राथमिक स्तर (कक्षा पहली से पांचवीं) में कुल 1,02,506 परीक्षार्थियों में से केवल 19,292 ही उत्तीर्ण हुए हैं। जबकि 83,214 अभ्यर्थी असफल रहे। इस स्तर पर कुल पात्रता प्रतिशत 18.82 प्रतिशत रहा।

उच्च प्राथमिक स्तर 36,377 अभ्यर्थी सफल
वहीं उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा छठवीं से आठवीं) में 1,82,384 परीक्षार्थियों में से 36,377 अभ्यर्थी सफल हुए हैं, जबकि 1,46,007 असफल रहे। इस स्तर पर पात्रता प्रतिशत 19.94 प्रतिशत दर्ज किया गया है। इनमें शिक्षक और अन्य अभ्यर्थी दोनों ही शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश और वर्तमान स्थिति
उच्चतम न्यायालय ने एक सितंबर 2025 को एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया था कि देश के सभी सरकारी और गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों (अल्पसंख्यक संस्थानों को छोड़कर) में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। बिना इस पात्रता के न तो नौकरी सुरक्षित रहेगी और न ही भविष्य में पदोन्नति (प्रमोशन) मिल सकेगी। इसी आदेश के अनुपालन में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने व्यापमं के माध्यम से परीक्षा आयोजित की थी।

अब शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है
विभागीय परीक्षा और पाठ्यक्रम में ढील की मांग परीक्षा के कठिन स्तर और निराशाजनक परिणाम को देखते हुए अब शिक्षक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और डीपीआइ को पत्र लिखकर मांग की है कि सेवारत शिक्षकों के लिए एक 'सीमित विभागीय टीईटी' आयोजित की जाए। संगठनों का तर्क है कि वर्तमान टीईटी का पाठ्यक्रम बहुत कठिन है, जिससे अनुभवी शिक्षकों को परेशानी हो रही है। यदि पाठ्यक्रम में शिथिलता प्रदान करते हुए विभागीय परीक्षा ली जाती है, तो शिक्षकों की नौकरी का संकट भी टलेगा और अदालती आदेश का पालन भी सुनिश्चित होगा।

डीपीआइ ने शुरू की कवायद, मांगा डेटा
शिक्षक संगठनों के दबाव के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआइ) एक्शन मोड में आ गया है। 13 मार्च 2026 को जारी एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से सभी संयुक्त संचालकों (जेडी) और जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) से शिक्षकों का आयुवार और श्रेणीवार डेटा मांगा गया है। विभाग अब इस जानकारी के आधार पर एक नई कार्ययोजना तैयार कर रहा है, जिससे बीच का कोई रास्ता निकाला जा सके।

दिल्ली में प्रदर्शन की चेतावनी
शिक्षकों के सब्र का बांध अब टूटता नजर आ रहा है। प्रदेश शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष राजनारायण द्विवेदी ने दोटूक कहा है कि यदि नियमों में रियायत नहीं दी गई, तो प्रदेश के हजारों शिक्षक चार अप्रैल को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन करेंगे। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से पढ़ा रहे हैं, ऐसे में अचानक उन पर कठिन परीक्षा थोपना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

 

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