सोलर पंप योजना में कमी: तय लक्ष्य से पीछे रह गई मध्य प्रदेश सरकार

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल

प्रदेश सरकार को कुसुम बी (प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना) के अंतर्गत भारत सरकार से 52 हजार सोलर पंप किसानों को देने का लक्ष्य मिला था, इसके मुकाबले किसानों को केवल 40 हजार 662 सोलर पंप ही दिए जा सके हैं। 11,338 सोलर पंप किसानों को मिले ही नहीं।

जबकि एक लाख किसानों ने आवेदन किया था। मप्र ऊर्जा विकास निगम का तर्क है कि जिन किसानों ने 10 प्रतिशत राशि जमा नहीं की, उनके आवेदन अमान्य कर दिए गए और जिन किसानों की राशि जमा हो गई थी, उन्हें कंपनियों के माध्यम से सोलर पंप उपलब्ध कराए गए हैं।

बता दें कि योजना में 90 प्रतिशत सब्सिडी सरकार देती है। किसानों को केवल 10 प्रतिशत राशि ही मिलानी होती है। इनमें एक से साढ़े सात हार्स पावर के सोलर पंप दिए गए हैं।

किसानों को 10 एचपी की जगह 7.5 एचपी सोलर पंप दे रहीं कंपनियांप्रदेश में जिन किसानों ने 10 हार्स पावर (एचपी) क्षमता के सोलर पंप के लिए आवेदन किया था, उन्हें 10 एचपी की जगह 7.5 एचपी पंप दिए जा रहे हैं।

कई जिलों में इसकी शिकायतें मिली है। जिन किसानों ने एक वर्ष पूर्व आवेदन कर राशि जमा की थी, उन्हें अब भी सोलर पंप मिलने का इंतजार है। ऊर्जा विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि किसानों ने स्वेच्छा से 10 हार्स पावर की जगह 7.5 हार्स पावर का सोलर पंप लिया है।

ऊर्जा विकास निगम की ओर से 10 एचपी पंप के लिए टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन कोई भी कंपनी टेंडर में भाग लेने नहीं आई।

बता दें कि पिछले वर्ष भिंड में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोलर पंप के लिए प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना पोर्टल की शुरुआत की थी और किसानों को 90 प्रतिशत अनुदान पर सोलर पंप देने की घोषणा की थी।

प्रारंभिक चरण में प्रदेशभर से एक लाख किसानों ने एक से 10 एचपी सोलर पंप के लिए पांच-पांच हजार रुपये जमा कर आवेदन किया था।

कुसुम बी में मिलता है लाभ- प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना।- 30% केंद्र सरकार, 30% राज्य सरकार।- बाद में राज्य सरकार ने अतिरिक्त 30% की छूट दी।अब कुल 10% किसान मिलाता है और 90% सरकार वहन करती है।

 

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