हजारीबाग
झारखंड के हजारीबाग में मनाई जाने वाली रामनवमी पूरे देश में अपनी अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां इस पर्व के दौरान पूरे शहर का रूप ही बदल जाता है, जिससे यह अयोध्या की झलक देता है।
जिले में रामनवमी का त्योहार बहुत खास तरीके से मनाया जाता है। इस दौरान शहर के अलग-अलग मोहल्लों, चौक-चौराहों और सड़कों के नाम बदल दिए जाते हैं। इन जगहों को नए धार्मिक नाम दिए जाते हैं, जो अयोध्या के स्थानों से प्रेरित होते हैं। रामनवमी के समय शहर के कई प्रमुख चौक नए नामों से जाने जाते हैं। जैसे जादो बाबू चौक को परशुरामगढ़, कुआं चौक को भारतगढ़, झंडा चौक को दशरथगढ़, पंच मंदिर चौक को कृष्णगढ़, गोल चौक को अभिमन्युगढ़, ग्वालटोली चौक को नारायणगढ़ और सुभाष मार्ग को अंगदगढ़ कहा जाता है। इन नए नामों के बोर्ड भी लगाए जाते हैं।
खास बात यह है कि रामनवमी जुलूस के दौरान लोग इन जगहों को उनके पुराने नाम से नहीं, बल्कि इन्हीं नए धार्मिक नामों से पुकारते हैं। इससे पूरा शहर एक धार्मिक माहौल में बदल जाता है। यह परंपरा कोई नई नहीं है, बल्कि करीब 100 साल से चली आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, हजारीबाग के राम भक्त इस शहर को अयोध्या के रूप में देखते हैं। इसी वजह से यहां के चौक-चौराहों का नाम अयोध्या की तर्ज पर रखा जाता है।
रामनवमी के मौके पर लाखों श्रद्धालु सड़कों पर निकलते हैं और भव्य जुलूस निकालते हैं। इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी रामनवमी महासमिति और अन्य समितियों की होती है, जो हर साल इसे और भव्य बनाने का काम करती हैं।
आज भी यह परंपरा उतनी ही जोश और आस्था के साथ निभाई जा रही है। नई पीढ़ी भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है। यही वजह है कि हजारीबाग की रामनवमी देशभर में एक अलग पहचान रखती है।
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