चण्डीगढ़
पंजाबी मूल की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नैंसी ग्रेवाल की हत्या में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। कनाडाई जांच एजेंसियों ने पहली बार यह संकेत दिया है कि इस हत्याकांड के पीछे खालिस्तानी समर्थक तत्वों का हाथ हो सकता है।
पुलिस का मानना है कि नैंसी का सोशल मीडिया पर खालिस्तान समर्थकों का लगातार और तीखा विरोध ही इस हत्या का मुख्य कारण बन सकता है। पंजाब के लुधियाना-जालंधर क्षेत्र की 45 वर्षीय नैंसी की 3 मार्च को ओंटारियो के लासाले में एक क्लाइंट के घर के बाहर चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस इस वारदात को सुनियोजित टारगेट किलिंग मान रही है।
40 से अधिक बार मिल चुकी थी धमकियां
परिवार के अनुसार, नैंसी को खालिस्तान विरोधी वीडियो पोस्ट करने के कारण 40 से अधिक बार जान से मारने की धमकियां मिल चुकी थीं। इस बारे में विंडसर पुलिस को सूचित किया गया था लेकिन सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाई।
जांच में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। पुलिस ओंटारियो में नैंसी के घर पर हुए पिछले साल के पेट्रोल बम हमले की भी जांच कर रही है, और शक जताया जा रहा है कि यह दोनों घटनाएं एक ही समूह के कृत्य हो सकती हैं।
जांच में निजी रंजिश का भी एंगल
पुलिस अब इस मामले में खालिस्तानी कट्टरपंथी लिंक की जांच कर रही है। हालांकि अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है लेकिन जांच में निजी रंजिश और अलगाववादी एंगल दोनों पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है। सिख कल्चरल सोसाइटी विंडसर के पूर्व प्रधान हरजिंदर सिंह कंदोला ने जांच को निष्पक्ष और ठोस सबूतों के आधार पर करने की अपील की है, ताकि पूरे सिख समुदाय को बिना वजह बदनाम न किया जाए। नैंसी की मां और बहन ने आरोप लगाया है कि उनकी निडर आवाज को दबाने के लिए यह हत्या की गई।
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