पंजाब की नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी: लीजहोल्ड प्लॉट अब फ्रीहोल्ड, एक्सचेंज नियम लागू

राज्य

चंडीगढ़.

पंजाब कैबिनेट ने लीजहोल्ड औद्योगिक प्लॉटों/शेडों को फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए नीति में संशोधनों को भी मंजूरी दी है। इन संशोधनों के अनुसार, बैंकों या वित्तीय संस्थाओं के पास गिरवी रखे गए औद्योगिक प्लॉट फ्रीहोल्ड में बदले जा सकते हैं, बशर्ते संबंधित बैंक द्वारा प्राप्त ‘नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ जमा करवाया गया हो और निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन किया गया हो। ऐसे मामलों में जहां मौजूदा टाइटल दस्तावेजों में अनार्जित वृद्धि संबंधी कोई धारा नहीं है, 5 प्रतिशत की कन्वर्जन फीस लागू होगी।

कुछ प्रतिबंधात्मक शर्तों पर जताई थी आपत्ति
मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि पहले हस्तांतरण नीति 2008, 2016 और 2021 में लाई गई थी। औद्योगिक संगठनों ने 2021 में लाई गई नीति की कुछ प्रतिबंधात्मक शर्तों पर आपत्ति जताई थी। इसके जवाब में एक कमेटी ने उद्यमियों की मांगों की समीक्षा की और फ्री होल्ड प्लॉटों पर लागू होने वाले परिवर्तनों का प्रस्ताव दिया। संशोधित नीति के अनुसार औद्योगिक प्लॉट की आरक्षित कीमत का 12.5 प्रतिशत हस्तांतरण शुल्क लागू होगा।

कैबिनेट ने विशेष रूप से पीएसआईईसी के प्रबंधन वाले लीजहोल्ड औद्योगिक प्लॉटों और शेड्स को फ्री होल्ड में बदलने की नीति को भी मंजूरी दे दी। ये प्लॉट और शेड मूल रूप से लीजहोल्ड आधार पर आवंटित किए गए थे, जिनमें परिवर्तन संबंधी जटिल धाराएँ शामिल थीं, जिसके कारण संपत्ति के लेन-देन में कठिनाइयां आ रही थी।

इस नई नीति का उद्देश्य औद्योगिक प्लॉटों के प्रबंधन को सुचारू करना, कारोबार में सुगमता बढ़ाना, आवंटियों के बीच मुकदमेबाजी और अनिश्चितता को कम करना है। इसके अलावा, इस हस्तांतरण से राज्य के लिए अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न होने की उम्मीद है। कैबिनेट ने एमएसएमई डेवलपमेंट एक्ट, 2006 के तहत एमएसई फैसिलिटेशन काउंसिल नियम-2021 में संशोधनों को मंजूरी दे दी। वर्तमान में जिला स्तर पर माइक्रो और स्मॉल इंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल संबंधित डिप्टी कमिश्नरों के नेतृत्व में काम कर रही हैं। हालांकि, इस एक्ट के तहत अवार्ड्स से संबंधित भुगतानों में देरी हो रही है।

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