नई पहल: 20KM तक एंबुलेंस सेवा 400 रुपये में, जापानी इंसेफेलाइटिस पर कड़ा कदम

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समस्तीपुर.

एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) पर नियंत्रण को राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। राज्य स्वास्थ्य समिति ने 12 जिलों को निर्देश जारी करते हुए मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत संचालित एंबुलेंसों को प्रत्येक पंचायत से टैग करने को कहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके।

इसके लिए जिला परिवहन पदाधिकारी से समन्वय स्थापित कर एंबुलेंसों की सूची तैयार की जाएगी। इसमें संचालकों के मोबाइल नंबर भी शामिल होंगे। यह सूची प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर उपलब्ध रहेगी। स्वास्थ्य समिति ने एंबुलेंस संचालकों के साथ एकरारनामा करना अनिवार्य किया है, ताकि मरीज को परिवहन में किसी प्रकार की बाधा न हो।

साथ ही, टैग वाहनों और उनके संचालकों की जानकारी सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित करने का भी निर्देश दिया गया है, जिससे आमजन को आसानी से जानकारी मिल सके। इस सेवा के लिए 20 किलोमीटर तक 400 रुपये, 21 से 40 किलोमीटर तक 600 रुपये, 41 से 60 किलोमीटर तक 800 रुपये और 61 किलोमीटर से अधिक दूरी के लिए अधिकतम 1000 रुपये का भुगतान किया जाएगा।

इन जिलों के पंचायतों में होगी टैगिंग
मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना अंतर्गत परिचालित एंबुलेंस का प्रत्येक पंचायत के साथ टैगिंग करना है। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने समस्तीपुर, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, वैशाली, सारण, सीवान एवं गोपालगंज जिले को पत्र जारी किया है।

निजी वाहन से लाने पर भी मिलेगा खर्च
राज्य स्वास्थ्य समिति ने एईएस प्रभावित जिलों में मरीजों को अस्पताल तक लाने में होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था वर्ष 2026 में भी जारी रखने का निर्देश दिया है। इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और सिविल सर्जन को पत्र भेजा गया है। समिति ने अपने पत्र में कहा है कि एईएस प्रभावित क्षेत्रों में अक्सर मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाने निजी एंबुलेंस या अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।

ऐसे में मरीज के परिजन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पहले से ही मरीज के परिवहन खर्च की प्रतिपूर्ति की व्यवस्था कर दी है। इस व्यवस्था को वर्ष 2026 में भी जारी रखने का फैसला लिया गया है, ताकि किसी भी परिवार को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। समिति ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2020, 2021, 2022, 2023, 2024 और 2025 की तरह ही 2026 में भी निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान किया जाएगा।

गर्मी और बारिश में बढ़ता है एईएस का खतरा
एईएस का प्रकोप आमतौर पर गर्मी और बारिश के मौसम में अधिक होता है। ऐसे समय में मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है। समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए परिवहन सुविधा को मजबूत करना प्राथमिकता है। सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि राज्य स्तर से पत्र जारी किया गया है। इस दिशा में प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

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