लखनऊ
ईरान-इस्त्राइल युद्ध के कारण मार्च से विभिन्न उद्योगों को एक हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। इसमें प्लास्टिक उद्योग सर्वाधिक प्रभावित हुआ है, जिसे 500 करोड़ रुपये से अधिक की हानि का अनुमान है। साबुन, गत्ता, बेकरी और रसायन जैसे अन्य उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
लखनऊ में करीब चार हजार प्लास्टिक उद्योगों का उत्पादन घटकर 20 फीसदी रह गया है। कच्चे माल की कीमतें दोगुनी होने से यह स्थिति बनी है। प्लास्टिक दाना जो नब्बे-सौ रुपये प्रति किलो मिलता था, वह दो सौ रुपये के पार पहुंच गया है। निजी और सरकारी कंपनियों में भी कच्चे माल की उपलब्धता नहीं है। बाजार 80 फीसदी तक घटने से उद्यमियों को रोजी-रोटी का संकट सता रहा है।
यूपी आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश प्रभारी अविनाश त्रिपाठी का कहना है कि मिठाई, रेस्टोरेंट, ढाबे और होटल कारोबार को एक महीने में दो सौ करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। लखनऊ में मिठाई की 2 बिक्री आधी रह गई है। गैस की किल्लत के कारण नाश्ता काउंटर भी नहीं चल पा रहे हैं।
सरोजनीनगर के प्लास्टिक उद्यमी अशोक चावला का कहना है कि हर दिन कच्चे माल की कीमत बढ़ रही है। होली के बाद से कई श्रमिकों को बुलाया भी नहीं गया है। यह स्थिति कब तक रहेगी, पता नहीं। बैंकों को कर्ज की किश्तें चुकाने में भी मुश्किल महसूस कर रही है।
आईआईए के चेयरमैन विकास खन्ना का कहना है कि पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ी कीमतें, गैस सिलिंडर की दिक्कतें, डीजल की कमी आदि से पूरे महीने उद्योग बेपटरी रहा। पैकेंजिंग कारोबार घटकर आधा रह गया। अभी भी स्थिति सुधरी नहीं है।
लखनऊ प्लास्टिक ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश गोस्वामी का कहना है कि उद्यमी अपनी पूंजी का 25 फीसदी हिस्सा खर्च कर चुके हैं। लागत बढ़ने से व्यापारी माल लेने को तैयार नहीं हैं, जिससे श्रमिकों के रोजगार पर भी संकट गहराया है।
सरोजनीनगर के उद्यमी रजत गुलाटी का कहना है कि साबुन उद्योग में पाम ऑयल, रसायन और पैकेजिंग सामग्री महंगी हुई है। इससे तैयार माल की लागत बढ़ी है और कारोबार पंद्रह-बीस फीसदी ही बचा है।
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