बॉर्डर पर तनाव, घरों पर असर: पंजाब में बढ़ती कीमतों से रसोई प्रभावित

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अमृतसर.

भले ही अमेरिका, ईरान और इजराइल जैसे देशों पर जंग के मैदान सजे हों, लेकिन इसकी तपिश अब हजारों मील दूर भारत और खासकर पवित्र शहर अमृतसर में महसूस की जा रही है। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव ने दुनिया भर में सप्लाई चेन पर जहां असर डाला है। वहीं इसका सीधा असर अमृतसर के बाजारों और आम आदमी की जेब पर पड़ता दिख रहा है।

विगत कुछ ही दिनों में खाने-पीने के खाद्य पदार्थों के अलावा रोजाना में प्रयोग होने वाली सभी चीजों पर खासा असर पड़ा है और लगभग सभी चाजों के दामों में वृद्धी आंकी जा रही है। इससे लोग काफी सकते में पंड़ चुके हैं कि आखिर वे करें भी तो क्या? और रोजाना की जरूरतों के दाम बढ़ गए हैं।

बॉर्डर एरिया होने से दोहरी मार 
अमृतसर एक बॉर्डर जिला है और इसकी इकॉनमी का एक बड़ा हिस्सा ट्रेड और टूरिज्म पर निर्भर करता है। जंग के हालात की वजह से इंटरनेशनल मार्किट में क्रूड ऑयल के दाम बढ़ गए हैं, जिससे माल ढुलाई बहुत महंगी हो गई है। इसका सीधा असर बाहरी राज्यों से आने वाली सब्जियों और दालों पर पड़ रहा है। अमृतसर की बड़ी सब्जी मंडी (वल्ला मंडी), लोहगढ़ की सब्जी की फड़ियो वाली मंडी के अलावा छेहरटा सब्जी मंडी में जहां सभी सबिज्यों के दाम आसमान छू चुके हैं, जिससे आम लोगों के बीच दामों को अब सब्जियों का जायका लेना काफी दूभर हो चुका है। इसके अलावा खाने-पीने वाले सभी पदार्थ व अन्य सामान भी अब महंगे दामों पर बिक रहा है।

बर्तन और तेल के दाम बढ़े
ईरान और उसके आस-पास के इलाकों से क्रूड ऑयल व खरेलू गैस एल.पी.जी की सप्लाई प्रभावित होने से माल-ढुलाई में खासा असर पड़ रहा है। इसको लेकर सप्लाई पर असर पड़ने के डर से कंपनियों ने खाने के तेलों (रिफाइंड और सरसों का तेल) के दाम 5 से 10 परसैंट बढ़ा दिए हैं। अमृतसर के बड़े बाजारों जैसे मजीठ मंडी और दाल मंडी के व्यापारियों का कहना है कि अगर लड़ाई और बीस-पच्चीस दिन लंबी चली तो फिर दालों और चीनी आदि के दाम और बढ़ सकते हैं। घरेलू रसोई गैस और पैट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का डर लोगों को अभी से सताने लगा है।

टूरिज्म और होटल इंडस्ट्री पर मंदी का खतरा
अमृतसर एक वर्ल्ड-क्लास टूरिज्म हब है। इंटर नैशनल फ्लाइट्स के रूट बदलने और फ्यूल के बढ़ते दामों की वजह से हवाई किराए बढ़ गए हैं। इससे श्री हरिमंदिर साहिब आने वाले विदेशी और एन.आर.आई श्रद्धालुओं की संख्या में भी काफी कमी आंकी जा रही है। होटल मालिकों के मुताबिक अगर महंगाई इसी तरह बढ़ती गई तो होटल के कमरों और खाने के रेट बढ़ा जाएंगे, जिससे शहर के टूरिज्म बिजनेस को बड़ा झटका लगेगा। इसके अलावा होटल वालों के लिए गैस सिलैंडर अब सबसे बड़ी समस्या बन चुके हैं। कई होटलों व ढाबों वालों ने गैस की किल्लत के कारण डीजल की भटि्टयों की ओर रूख किया है, जिससे उनकी खाना बनाने की लागत काफी बढ़ चुकी है। अब वो कब तक मूल्य स्थिर रख सकेगें, ये तो समय के गर्भ में है।

ड्राई फ्रूट्स और ट्रेड पर असर 
अमृतसर को ड्राई फ्रूट्स ट्रेड का हब माना जाता है। युद्ध के रास्तों की वजह से अब अफगानिस्तान और मिडिल ईस्ट के देशों से आने वाला सामान रुक रहा है। इससे बादाम, काजू और किशमिश जैसी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। ट्रेडर्स का कहना है कि स्टॉक कम हो रहा है और डिमांड बढ़ रही है, जिससे आने वाले त्योहारों के सीजन में ये चीजें आम लोगों के लिए खरीदना मुश्किल हो सकता है।

स्थानीय लोगों और एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी 80 परसैंट से ज्यादा तेल की जरूरतों के लिए इंपोर्ट पर निर्भर है, यह युद्ध किसी आर्थिक सुनामी से कम नहीं है। अमृतसर में मिडिल क्लास परिवारों का कहना है कि पहले से ही नौकरियों की कमी है और अब महंगाई ने उनकी कमर तोड़ दी है। अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए और युद्ध जारी रहा, तो अमृतसर के हर घर का बजट पूरी तरह से बिगड़ जाएगा।

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