गढ़पहाड़ की गुफाओं में जीवंत है प्रागैतिहासिक संस्कृति की अनमोल धरोहर

छत्तीसगढ़ रायपुर

रायपुर

गढ़पहाड़ की गुफाओं में झलकती प्रागैतिहासिक सभ्यता की अनूठी विरासत

प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध जशपुर जिला अब अपनी समृद्ध पुरातात्विक धरोहर के कारण भी विशेष पहचान बना रहा है। जिले से लगभग 30 किलोमीटर दूर मनोरा विकासखंड के ग्राम जयमरगा स्थित गढ़पहाड़ की गुफा में मिले आदिमकालीन शैलचित्र प्रागैतिहासिक मानव जीवन की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करते हैं। यह स्थल न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत आकर्षक बनता जा रहा है।

ग्राम पंचायत डड़गांव के आश्रित ग्राम जयमरगा की आबादी लगभग 1400 है और यहां तक सड़क मार्ग से सहज पहुंचा जा सकता है। गांव से लगभग 300 मीटर ऊँची पहाड़ी पर चढ़ाई करने के बाद गढ़पहाड़ की इस प्राकृतिक गुफा तक पहुंचा जाता है। घने जंगलों के बीच स्थित यह गुफा आज भी स्थानीय ग्रामीणों के लिए आस्था का केंद्र है, जहां वे पूजा-अर्चना करते हैं।

पुरातत्त्ववेत्ता डॉ. अंशुमाला तिर्की एवं  बालेश्वर कुमार बेसरा के अनुसार, जयमरगा क्षेत्र प्रागैतिहासिक स्थलों की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। यहां पहाड़, जंगल और नदी की उपलब्धता के कारण प्राचीन मानव के लिए भोजन, पानी और आश्रय की समुचित व्यवस्था रही होगी। इसी कारण यह क्षेत्र आदिमानवों के निवास का प्रमुख केंद्र रहा प्रतीत होता है।

गुफा में प्राप्त शैलचित्र मध्य पाषाण काल से संबंधित माने जा रहे हैं। इन चित्रों में मानव आकृतियों के साथ-साथ पशु आकृतियाँ, ज्यामितीय आकृतियाँ तथा कुछ रहस्यमयी आकृतियाँ भी अंकित हैं। लाल एवं सफेद रंगों से बनाए गए ये चित्र उस समय की कलात्मक अभिव्यक्ति और जीवन शैली को दर्शाते हैं। विशेष रूप से बैल, तेंदुआ, हिरण और मानव 

आकृतियों का चित्रण उस काल के शिकार एवं सामाजिक जीवन की कहानी कहता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह गुफा संभवतः प्राचीन काल में पहरेदारी स्थल के रूप में प्रयुक्त होती रही होगी, जहां से शिकारी वन्यजीवों पर नजर रखते थे। यहां हेमाटाइट पत्थर की उपलब्धता भी पाई गई है, जिसका उपयोग रंग बनाने में किया जाता था। इसके अतिरिक्त, स्थल से माइक्रोलिथिक उपकरण जैसे लुनैट, स्क्रैपर, पॉइंट, ट्रैपेज, साइड स्क्रैपर और ब्लेड भी प्राप्त हुए हैं, जो उस समय के मानव द्वारा शिकार एवं दैनिक कार्यों में उपयोग किए जाते थे। गढ़पहाड़ की यह गुफा जशपुर जिले की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को सहेजने का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित किए जाने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी प्रागैतिहासिक मानव सभ्यता के इस अद्भुत साक्ष्य से परिचित हो सकें।वाल लेखन कर MSW छात्रा द्वारा जल संरक्षण के लिए किया जा रहा जागरूक- जन अभियान परिषद

मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार जल गंगा संवर्धन अभियान पुरे मध्यप्रदेश मे चालया जा रहा है  अभियान अंतर्गत जिला समन्वयक  रविन्द्र शुक्ला के निर्देश पर विकासखंड करकेली के सेक्टर 2 निगहरी के परामर्शदाता संतोष त्रिपाठी के मार्गदर्शन मे MSW छात्रा साक्षी जैन    द्वारा दीवार लेखन कर जल स्त्रोतो व जल संरक्षण के प्रति  समाज को जागरूक किया जा रहा है । साक्षी जैन द्वारा समस्त समाज से आग्रह किया गया कि आप सभी भी इस अभियान का हिस्सा बनें और जल संरक्षण हेतु प्रेरित करें , जब सर्व समाज एक जुट होकर आगे बढ़ेगा तो हम सभी के प्रयास से यह अभियान सफलतम रास्ते पर अग्रसर रहेगा ।

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