24 घंटे की समयसीमा और 72 घंटे का इंतजार, एनएचआरसी के नियमों के बीच फंसा प्रशांत बोस का अंतिम संस्कार

राज्य

रांची
एक करोड़ रुपये के इनामी रहे प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस (82 वर्ष) की मौत बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में तीन अप्रैल को हो गयी थी. इसके बाद प्रशांत बोस का शव रिम्स के मोर्चरी में पड़ा रहा. बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद उसकी पत्नी और माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य शीला मरांडी ने जेल प्रशासन के माध्यम से जिला प्रशासन को पत्र लिखकर कहा कि उसके पति का कोई अन्य परिजन नहीं है. इसलिए जिला प्रशासन ही अंतिम संस्कार की व्यवस्था करे. हालांकि शनिवार रात तक जिला प्रशासन के स्तर पर इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका था.

जेल प्रशासन ने खड़े किए हाथ
इससे पहले शनिवार को कोलकाता से प्रशांत बोस के कुछ परिजन बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा पहुंचे. परिजनों ने जेल प्रशासन के अधिकारियों को एक पत्र दिखाया, जो प्रशांत बोस के बड़े भाई का था. उस पत्र में लिखा था कि उनकी उम्र 84 वर्ष है और वे स्वयं आकर अपने भाई का शव ले जाने में असमर्थ हैं. इसलिए उन्होंने अन्य परिजनों को भेजा है. उनके भाई प्रशांत बोस का शव उन्हें सौंप दिया जाये ताकि वे अपने रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर सकें. जेल प्रशासन ने उन्हें जिला प्रशासन के पास यह कहते हुए भेज दिया कि इस पर निर्णय लेना जेल प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में नहीं है. इसके बाद परिजनों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर शव सौंपने की मांग की.

बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा के अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर ने बताया कि जेल में बंद उनकी पत्नी शीला मरांडी ने पत्र लिखकर कहा है कि प्रशासन स्वयं प्रशांत बोस का अंतिम संस्कार कर दे, क्योंकि उनका कोई परिजन नहीं है. दूसरी ओर, कोलकाता से उनके बड़े भाई का पत्र लेकर कुछ लोग आये थे, जिन्हें जिला प्रशासन से संपर्क करने के लिए कहा गया था.

अब क्या होगा
प्रशांत बोस की मृत्यु की सूचना एनएचआरसी और रांची के न्यायिक आयुक्त को भेज दी गयी है. न्यायिक आयुक्त स्तर पर मामले की जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट से करायी जा सकती है. जिला प्रशासन जिस व्यक्ति को भी प्रशांत बोस का शव सौंपेगा, उसकी प्राप्ति रसीद जेल प्रशासन को देनी होगी, ताकि इसकी सूचना एनएचआरसी को दी जा सके.

क्या है एनएचआरसी का दिशा-निर्देश
एनएचआरसी के दिशानिर्देश के अनुसार मृत बंदी का अंतिम संस्कार 24 घंटे के भीतर कर दिया जाना चाहिए. परिजन द्वारा दावा किये जाने की स्थिति में प्रशासन अधिकतम 72 घंटे तक शव को मोर्चरी में रख सकता है. बंदी की मृत्यु पर अंतिम संस्कार के लिए कितनी राशि दी जायेगी, इसका स्पष्ट उल्लेख जेल मैनुअल में नहीं है.

क्या कहना है डीसी का
रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि प्रशांत बोस की मृत्यु शुक्रवार की सुबह हुई है. अंतिम संस्कार के लिए जिला प्रशासन से अनुरोध किया गया है. हम प्राप्त पत्र का परीक्षण कर रहे हैं और संबंधित पक्षों से मंतव्य भी लिया जा रहा है.

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