एफएमडीए का मास्टर प्लान, एनआईटी के व्यस्त चौराहों का होगा कायाकल्प, पैदल यात्रियों और पार्किंग को मिलेगी प्राथमिकता

राज्य

फरीदाबाद

फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) की तरफ से एनआईटी की साढे़ सात किलोमीटर लंबी सड़कों को मॉडल सड़कों के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य सड़कों की गुणवत्ता सुधारने के साथ-साथ ट्रैफिक प्रबंधन, पैदल यात्रियों की सुविधा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है, जिससे लोगों को जाम से निजात मिलने के साथ जीवन स्तर में सुधार होने की उम्मीद है। इस योजना पर लगभग 67 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

ये सड़कें बनाई जाएंगी मॉडल रोड
एनआईटी क्षेत्र की ज्यादातर सड़कें फिलहाल जर्जर हालत में हैं। कई जगह गड्ढे, टूटी परत और उखड़ी सतह के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। धूल उड़ने से प्रदूषण भी बढ़ रहा है। अव्यवस्थित पार्किंग और फुटपाथों की कमी से जाम की स्थिति बनी रहती है। बारिश के दौरान पानी भरने से हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं। इसे देखते हुए एफएमडीए ने व्यापार मंडल से टिकाना पार्क, टिकाना पार्क से ईएसआई चौक, ईएसआई से चिमनी बाई चौक, चिमनी बाई से मुल्ला होटल, चिमनी बाई से एसबीएस चौक, एसीपी ऑफिस से बीके चौक और बीके से हार्डवेयर चौक तक की सड़कों को मॉडल सड़क बनाने की योजना बनाई है। इसके तहत इन सड़कों को न केवल चौड़ा किया जाएगा, बल्कि इन्हें पूरी तरह स्मार्ट सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

पैदल राहगीरों को तरजीह
अक्सर देखा जाता है कि मुख्य सड़कों पर पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों के लिए कोई जगह नहीं बचती, जिससे दुर्घटनाओं का अंदेशा हमेशा बना रहता है। इस मॉडल रोड के डिजाइन में सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।

स्मार्ट सिग्नलिंग होगी
व्यस्त चौराहों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए आधुनिक सिग्नल को शामिल किया गया है। यह स्मार्ट सिस्टम ट्रैफिक के दबाव को भांपकर सिग्नल की टाइमिंग को खुद समायोजित करेगा।

ये सुविधाएं मिलेंगी
योजना के तहत इन सड़कों पर मल्टी-यूटिलिटी जोन बनाए जाएंगे, जहां बिजली, पानी, गैस, टेलीकॉम और अन्य सेवाओं की लाइनें सुव्यवस्थित तरीके से एक ही कॉरिडोर में डाली जाएंगी। इससे बार-बार सड़क खोदने की समस्या खत्म होगी और रखरखाव आसान होगा। पैदल यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए चौड़े और सुरक्षित फुटपाथ बनाए जाएंगे।

आठ महीने का लक्ष्य
एफएमडीए ने योजना पूरी करने के लिए 18 महीने की डेडलाइन तय की है। पहले चरण में सड़कों के बुनियादी ढांचे, मजबूतीकरण और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने पर जोर रहेगा, ताकि जलभराव की समस्या जड़ से खत्म हो।

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