शिक्षा में सख्ती: MP बोर्ड ने 5वीं-8वीं के 1.29 लाख फेल छात्रों के लिए मई में पुनः परीक्षा तय की

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल

प्रदेश में पांचवीं और आठवीं की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम में इस बार बड़ी संख्या में विद्यार्थी अनुत्तीर्ण हुए हैं। दोनों कक्षाओं के करीब 1.29 लाख विद्यार्थी 33 प्रतिशत अंक भी हासिल नहीं कर सके। अब इन विद्यार्थियों को एक और मौका देते हुए मई के दूसरे सप्ताह में पुनः परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसमें पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थी भी शामिल हो सकेंगे। इस संबंध में राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिलों और स्कूलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। जहाँ पांचवीं में करीब 62 हजार और आठवीं में करीब 67 हजार विद्यार्थी फेल हुए हैं, ऐसे विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से पुनः परीक्षा में शामिल होना होगा।

कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष शैक्षणिक व्यवस्था

विभाग का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को एक और अवसर देकर उन्हें अगली कक्षा में आगे बढ़ने का मौका दिया जा सके। राज्य शिक्षा केंद्र ने स्कूलों और शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे फेल हुए विद्यार्थियों के लिए विशेष तैयारी कराएं। इसके तहत अतिरिक्त कक्षाएं, अभ्यास सत्र और कमजोर विषयों पर विशेष ध्यान देने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि विद्यार्थी पुनः परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। स्कूलों को यह भी कहा गया है कि कमजोर छात्रों की पहचान समय रहते की जाए और उन्हें आवश्यक शैक्षणिक सहयोग दिया जाए।

33 प्रतिशत से कम अंक लाने वाले नहीं होंगे प्रोन्नत

दिशा-निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई विद्यार्थी पुनः परीक्षा में भी न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं कर पाता है, तो उसे उसी कक्षा में दोबारा अध्ययन करना होगा। यानी ऐसे छात्रों को अगली कक्षा में प्रोन्नत नहीं किया जाएगा। शिक्षकों को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे नियमित रूप से अतिरिक्त समय देकर विद्यार्थियों को पढ़ाएं और अभ्यास प्रश्नों के माध्यम से उनकी समझ मजबूत करें। विद्यार्थियों को सरल भाषा में समझाते हुए बार-बार पुनरावृत्ति कराई जाए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे सकें।

अतिरिक्त कक्षाएं और अभिभावकों की भूमिका

स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि 5वीं और 8वीं में अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों की तैयारी के लिए स्कूलों में विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएं। इन कक्षाओं में विषयवार कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करने पर विशेष जोर दिया जाए। इसके साथ ही, अभिभावकों को भी बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने और नियमित उपस्थिति के लिए प्रेरित किया जाए। शिक्षकों को कहा गया है कि वे विद्यार्थियों के मन से परीक्षा का डर निकालें और उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करें ताकि अगली परीक्षा में सफलता सुनिश्चित हो सके।

 

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