स्वास्थ्य और रोजगार पर सरकार का बड़ा प्रहार, पटना में करीब 5 हजार एएनएम की नियुक्ति से सुधरेंगी सेवाएं

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पटना

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में आयोजित एक भव्य समारोह में 4954 एएनएम (विमेन हेल्थ वर्कस) को नियुक्ति पत्र सौंपे. इस मौके पर राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री भी मौजूद रहे. यह पहल राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत बनाने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में अहम मानी जा रही है.
 मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली रवाना होने से ठीक पहले बिहार के ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र को एक नई ऊर्जा से भर दिया है. पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित एक समारोह में सीएम ने 4954 नवनियुक्त एएनएम (महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता) को नियुक्ति पत्र सौंपे.
यह केवल सरकारी नौकरी का वितरण नहीं था, बल्कि सुदूर गांवों तक ‘इलाज और एहतियात’ का भरोसा पहुंचाने की एक मुहिम है.

‘ईमानदारी से करें सेवा’
पटना के शास्त्रीनगर स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से तब गूंज उठा जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चयनित महिला अभ्यर्थियों को मंच पर बुलाकर नियुक्ति पत्र प्रदान किए. इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी नवनियुक्त एएनएम को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए एक मंत्र भी दिया.

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि मानवता की सेवा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी एएनएम पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल करेंगी.

इस नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने विभाग की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि रिकॉर्ड समय में इन नियुक्तियों को पूरा करना सरकार की प्राथमिकता रही है. स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस मौके पर शिरकत की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि राज्य सरकार अब स्वास्थ्य और रोजगार को विकास के केंद्र बिंदु में रखकर काम कर रही है.

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती
एक साथ 4954 एएनएम की तैनाती से बिहार के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और उपकेंद्रों की तस्वीर बदलने वाली है. इस नियुक्ति से विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी सुधार आएगा. टीकाकरण अभियान से लेकर प्रसव पूर्व देखभाल तक, अब सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी नर्सों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी. इससे न केवल बड़े अस्पतालों पर मरीजों का बोझ कम होगा, बल्कि मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिलेगी.

यह कदम बिहार की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और समाज की मुख्यधारा में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है. नियुक्ति पत्र पाकर इन महिला स्वास्थ्य कर्मियों के चेहरे पर जो मुस्कान दिखी, वह राज्य के बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश की गवाही दे रही है.

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