प्रदेश में संपत्ति के मालिकाना हक में बदलाव पर बढ़ा खर्च, स्टांप शुल्क में वृद्धि

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल 

संपत्ति का परिवार में ही विक्रय या टाइटल में बदलाव पर भोपाल समेत मप्र में कलेक्टर गाइडलाइन का सवा फीसदी से दस फीसदी तक शुल्क चुकाना पड़ रहा है। उप्र में ये महज पांच हजार रुपए में हो जाता है। वहां रजिस्ट्री फीस फिक्स्ड है। पारिवारिक संपत्ति में मालिकाना हक बदलने की महंगी दर की वजह से यहां लोग बेहद जरूरी होने पर ही मालिकाना हक बदलवाते हैं, बाद में ये देरी पारिवारिक विवाद की वजह बनती है।

मौजूदा संपत्ति मामलों में 60 फीसदी पारिवारिक ही है। सालाना करीब 15 हजार संपत्तियां परिवार में ही ट्रांसफर होती है। यदि उप्र की तरह यहां भी पारिवारिक मालिकाना हक बदलवाने की दर सस्ती हो तो ये विवाद खत्म हो जाए।

अभी मध्यप्रदेश में है ये नियम
    नगरीय निकाय के भीतर संपत्ति है और परिवार में इसे गिफ्ट करना चाहते हैं तो संपत्ति मूल्य का दस फीसदी स्टांप शुल्क लिया जाता है।

    नगरीय निकाय से बाहर के इलाके में संपत्ति है और परिवार में इसे गिफ्ट करना चाहते हैं, तो सात फीसदी स्टांप ड्यूटी लगती है।

    संपत्ति का एक को-ऑनर अपनी संपत्ति का हिस्सा साथी को-ऑनर के नाम करना चाहता है तो हक विलेख किया जाता है, इसमें 1.3 फीसदी स्टांप शुल्क लगता है।

    को-ऑनर परिवार से बाहर का सदस्य है तो हक विलेख करने पर स्टांप शुल्क 5.8 फीसदी लगता है।

यूपी में है ये नियम
उत्तर प्रदेश सरकार ने पुरखों की संपत्ति के बंटवारे से लेकर पारिवारिक संपत्ति को परिवार में ही दूसरे सदस्य के नाम करने पर महज 5000 रुपए स्टांप शुल्क तय कर दिया। इसके लिए स्टांप एवं निबंधन विभाग के नियमों को बदला जा रहा है।

तो मिले ये लाभ

    पारिवारिक संपत्ति विवाद 60 फीसदी तक खत्म होंगे।
    बंटवारा ये लेकर हक त्याग आसान और सस्ता होगा।

परिवार में हक विलेख पर 1.3 फीसदी शुल्क, जबकि गिफ्ट पर नगरीय सीमा में दस फीसदी स्टांप ड्यूटी लगेगी। मप्र सरकार के नियम हैं, जो पूरे प्रदेश में समान तौर पर लागू होते हैं। स्वप्नेश शर्मा, जिला पंजीयक, भोपाल

एमपी में प्रॉपर्टी खरीदना महंगा
मध्य प्रदेश में 1 अप्रेल से प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री महंगी हो चुकी है। केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक में विभिन्न जिलों की नई कलेक्टर गाइडलाइन को मंजूरी दे दी गई है। इससे प्रदेश में जमीन की कीमतों में औसतन 16% की बढ़ोतरी हो गई है। प्रदेश में कुल एक लाख से अधिक लोकेशन में से करीब 65 हजार स्थानों पर रेट बढ़ाए गए हैं। हालांकि कुछ क्षेत्रों में रेट यथावत भी रखे हैं। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी इंदौर और भोपाल की प्रॉपर्टी में हुई है।

विभिन्न जिलों में 5 से 300 प्रतिशत तक रेट बढ़ाए गए। भोपाल में अधिकतम 180 प्रतिशत तक रेट बढ़ेंगे। इंदौर में कई लोकेशन पर 300% इजाफा होगा। यही नहीं इस बार पक्के मकानों की निर्माण लागत भी बढ़ा दी गई है। बने हुए मकानों की रजिस्ट्री और महंगी हो जाएगी। नई गाइडलाइन 1 अप्रेल से लागू होने के बाद रजिस्ट्री के लिए नए रेट्स के आधार पर ही जमीन का मूल्यांकन किया जाएगा, इसी के अनुसार स्टाम्प और पंजीयन शुल्क लगेगा।

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