नई दिल्ली
अगर आपका बच्चा 2026 में कक्षा 6 में प्रवेश ले रहा है, तो यह खबर आपके लिए सबसे जरूरी है. CBSE ने अपनी भाषा नीति में बड़ा फेरबदल किया है. अब तक बच्चे दो भाषाएं पढ़ते थे, लेकिन अब उन्हें तीन भाषाएं पढ़नी होंगी. आइए जानते हैं कि क्या इससे आपके बच्चे पर पढ़ाई का बोझ बढ़ने वाला है।
क्या है R1, R2 और R3 का गणित?
R1 (Language 1): यह वह भाषा है जिसमें बच्चा सबसे ज्यादा सहज है (जैसे हिंदी). इसे सबसे ऊंचे स्तर पर पढ़ाया जाएगा.
R2 (Language 2): यह दूसरी भाषा होगी जो स्टैंडर्ड लेवल पर होगी.
R3 (Language 3): यह नई अनिवार्य भाषा है जो कक्षा 6 से शुरू होगी.
'अंग्रेजी अब विदेशी भाषा' पेरेंट्स के लिए सबसे बड़ा अपडेट
सबसे चौंकाने वाला बदलाव यह है कि नए नियमों में अंग्रेजी को 'विदेशी भाषा' माना गया है. इसका मतलब यह है कि अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा अंग्रेजी पढ़े, तो उसे दो भारतीय भाषाएं (जैसे हिंदी + संस्कृत, या हिंदी + मराठी) अनिवार्य रूप से चुननी होंगी. अब आप केवल 'हिंदी और अंग्रेजी' पढ़कर 10वीं पास नहीं कर पाएंगे।
क्या स्कूल हैं इस बदलाव के लिए तैयार?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस 'प्रगतिशील' विजन के रास्ते में कुछ बड़ी व्यावहारिक चुनौतियां हैं. इसमें बताया गया है कि उत्तर भारत के स्कूलों में दक्षिण या पूर्व भारतीय भाषाओं के शिक्षकों की भारी कमी है. अगर छात्र 'ओडिया' या 'तमिल' पढ़ना चाहे, तो स्कूलों के पास फैकल्टी नहीं है।
स्कूल प्रिंसिपल्स का कहना है कि नए भाषा विशेषज्ञों की भर्ती और इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करने का सीधा असर स्कूल के बजट पर पड़ेगा, जिसकी भरपाई ट्यूशन फीस बढ़ाकर की जा सकती है. इसके अलावा कई छोटे शहरों के स्कूलों के पास अभी भी एआई (AI) और कोडिंग जैसे अनिवार्य विषयों के लिए लैब नहीं हैं, ऐसे में तीसरी भाषा का बोझ उठाना उनके लिए मुश्किल होगा।
मैथ्स और साइंस में 'एडवांस' विकल्प
भाषा के अलावा, पेरेंट्स के लिए एक और अच्छी खबर है. कक्षा 9 से मैथ्स और साइंस में 'Standard' के साथ 'Advanced' लेवल भी होगा. अगर आपके बच्चे को इंजीनियरिंग में रुचि है, तो वह 'एडवांस' पेपर (25 नंबर का अलग टेस्ट) दे सकता है।
खास बात यह है कि एडवांस पेपर के नंबर कुल प्रतिशत (Percentage) में नहीं जुड़ेंगे, लेकिन मार्कशीट पर 'एडवांस लेवल पास' का टैग अलग से चमकेगा।
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