फरीदाबाद
शहर की कनेक्टिविटी को विश्वस्तरीय बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई दो महत्वाकांक्षी परियोजनाएं, ईस्ट-टु-वेस्ट कनेक्टिविटी (बाटा रूट) और नमो भारत (RRTS) अब एक-दूसरे के सामने आ खड़ी हुई हैं। दोनों परियोजनाओं का रूट और अलाइनमेंट लगभग एक समान होने के कारण निर्माण से पहले ही तकनीकी टकराव की स्थिति बन गई है। इस चुनौती को सुलझाने के लिए फरीदाबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (FMDA) और RRTS के अधिकारी लगातार मंथन कर रहे हैं। हालांकि, इस कारण परियोजनाओं में देरी की आशंका भी जताई जा रही है।
ये आ रही दिक्कत
ईस्ट-टू-वेस्ट कनेक्टिविटी प्रॉजेक्ट के तहत बाटा चौक से एनआईटी होते हुए सैनिक कॉलोनी से फरीदाबाद गुरुग्राम रोड से कनेक्ट होगा। वहीं, गुरुग्राम से फरीदाबाद आने वाली नमो भारत ट्रेन का रूट भी इसी अलाइनमेंट से गुजर रहा है। आरआरटीएस कॉरिडोर सैनिक कॉलोनी से मस्जिद चौक, हार्डवेयर चौक और बाटा चौक होते हुए ग्रेटर फरीदाबाद की ओर जाएगा। दोनों परियोजनाओं के पिलर और ढांचा लगभग एक ही स्थान पर प्रस्तावित होने के कारण तकनीकी अड़चन सामने आई है।
ईस्ट-टू-वेस्ट प्रॉजेक्ट एक नजर में
यह परियोजना पश्चिम में एनआईटी फरीदाबाद को पूर्व में ग्रेटर फरीदाबाद से जोड़ेगी। इस प्रोजेक्ट से शहर के अंदर का जाम कम होगा और ग्रेटर फरीदाबाद की गुरुग्राम से बेहतर कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
प्रारंभ: ग्रेटर फरीदाबाद के बीटीपी श्रेत्र से।
रूट: नैशनल हाइे को पार करते हुए बाटा चौक, फिर, हार्डवेयर चौक, प्याली चौक, सब्जी मंडी औ अनाज गौदाम होते हुए मस्जित चौक से सैनिक कॉलोनी तक।
समाधान की तलाश: पैरलल अलाइनमेंट?
तकनीकि दिक्कत को दूर करने के लिए होगी मंथन
कंबाइंड अलाइनमेंट: हो सकता है कि ईस्ट-वेस्ट एलिवेटेड रोड और नमो भारत का रूट एक साथ चलाया जाए।
अलाइनमेंट री-डिजाइन: रूट में थोड़ा बदलाव किया जा सकता है ताकि पिलर एक-दूसरे के काम में बाधा न डाले।
संयुक्त पिलर तकनीक: क्या कुछ हिस्सों में एक ही पिलर पर ऊपर ट्रेन और नीचे सड़क संभव हैं? अधिकारी इस संभावना पर विचार कर सकते हैं।
दोनों परियोजनाएं शहर के लिए बेहत जरूरी है। अधिकारियों का प्रयास है कि न्यूनतम बदलाव के साथ जल्द अंतिम अलाइनमेंट तय कर लिया जाए, ताकि फरीदाबाद को गुरुग्राम और नोएडा से जोड़ने की योजना समय पर साकार हो सके।
देरी की आशंका से चिंता बढ़ी
यदि अनाइनमेंट में बदलाव होता है तो नई ड्रॉइंग, डिजाइन और तकनीकी सर्वे की जरूरत पड़ेगी। इससे प्रॉजेक्ट की शुरुआत और समय सीमा प्रभावित हो सती है। पहले से ट्रैफिक के जाम से जूझ रहे शहरवासियों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। क्योंकि उन्हें इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के और इंतजार करना पड़ सकता है।
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