चंडीगढ़.
हरियाणा की सड़कों पर अब जल्द ही केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि पिंक कैब दौड़ाती 'लखपति दीदी' भी नजर आएंगी। प्रदेश की नायब सैनी सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए 'पिंक कैब योजना' को धरातल पर उतारने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा कर साफ कर दिया है कि सरकार का विजन महिलाओं को सिर्फ चूल्हे-चौके तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें उद्यमी बनाना है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जो महिलाएं अपना खुद का काम शुरू करना चाहती हैं, उन्हें इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाएगा, जिस पर कोई ब्याज नहीं लगेगा।
पिंक कैब की अवधारणा नई नहीं है—बेंगलुरु, दिल्ली और कोलकाता जैसे महानगरों में यह सफल रही है, लेकिन हरियाणा इसे एक बड़े सामाजिक बदलाव के रूप में देख रहा है। अक्सर देर रात या अकेले सफर करने वाली महिलाओं के मन में सुरक्षा को लेकर जो डर रहता है, यह सेवा उसे जड़ से खत्म करेगी। महिला ड्राइवर होने की वजह से महिला यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा, जिससे इस सर्विस की डिमांड मार्केट में स्वतः ही बढ़ जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे न केवल स्वरोजगार के रास्ते खुलेंगे, बल्कि सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में आधी आबादी की हिस्सेदारी भी मजबूती से दर्ज होगी।
सरकार का सीधा लक्ष्य स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी करीब 5 लाख महिलाओं को 'लखपति दीदी' की श्रेणी में लाना है। लखपति दीदी वह है, जिसकी सालाना आय कम से कम 1 लाख रुपये हो। पिंक कैब चलाने वाली महिलाएं महीने में 10 से 15 हजार रुपये की नियमित आय आसानी से कमा सकेंगी, जिससे उनका जीवनस्तर सुधरेगा। खास बात यह है कि सरकार केवल लोन देकर पल्ला नहीं झाड़ रही, बल्कि इन महिलाओं को प्रोफेशनल ड्राइविंग और यात्रियों के साथ व्यवहार करने का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
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