भोपाल AIIMS में चौंकाने वाला मामला: NICU में 3 दिन में 25 मरे चूहे मिले, संक्रमण का खतरा बढ़ा

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) तक में मरे हुए चूहे मिल रहे हैं। तीन दिनों में यहां 25 से अधिक चूहों के शव मिल चुके। दूसरे वार्डों में भी चूहों की आवाजाही दिखी। एनआईसीयू जैसे संवेदनशील वार्ड में चूहों की मौजूदगी से गंभीर समस्याओं से जूझ रहे नवजात बच्चों में गंभीर संक्रमण का खतरा बन गया है। एम्स के बेसमेंट में जमा कबाड़ और मेडिकल वेस्ट चूहों की हेचरी बना हुआ है। यह उनका मुख्य ठिकाना है।

यहां से चूहे एसी डक्ट (हवा आने-जाने वाली नलिकाओं) के सहारे ऊपरी मंजिलों तक पहुंच रहे हैं। एम्स प्रबंधन चूहों और कॉकरोच के प्रबंधन के लिए जो उपाय कर रहा था वह वार्डों तक सीमित रहा। इसकी वजह से बेसमेंट और कूलिंग डक्ट के भीतर इनकी संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ती चली गई। इस दौरान चूहे वार्डों और संवेदनशील क्षेत्रों में निर्बाध आवाजाही करते रहे, लेकिन प्रबंधन ने उनको नियंत्रित करने पर कोई ध्यान नहीं दिया।

अप्रैल की शुरुआत में एसी मेंटिनेंस करने पहुंची टीम को डक्ट के भीतर चूहों के कारीडोर का पता चला। उसके बाद पेस्ट कंट्रोल अभियान को डक्ट पर केंद्रित किया गया है। सफाई कर्मचारियों के मुताबिक, अब चूहे डक्ट से बाहर निकलकर वार्डों और कारिडोर में भाग रहे हैं और वहीं मर रहे हैं। बीते 72 घंटों में 25 से अधिक चूहों के शव उठाए जा चुके हैं।

मासूमों की जान जोखिम में
एनआईसीयू में इस समय करीब 20 नवजात भर्ती हैं। एक कर्मचारी ने बताया कि वार्ड में चूहों की आवाजाही आम हो गई है। डर इस बात का है कि दवा खाने के बाद चूहे वार्ड के कोनों में दम तोड़ रहे हैं। इससे फैलने वाला संक्रमण उन मासूमों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही बहुत कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि चूहों के बाल, मल-मूत्र और मृत शरीर से फैलने वाले बैक्टीरिया गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकते हैं।

दवा के असर से यहां-वहां दम तोड़ रहे चूहे
एम्स प्रबंधन का दावा है कि दवा के असर से चूहे बाहर निकल रहे हैं और मर रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा की जा रही है और मृत चूहों को तुरंत हटाकर क्षेत्र को वैज्ञानिक तरीके से सैनिटाइज किया जा रहा है।

इनका कहना है –
चूहों और काकरोजों को मारने के लिए नियमित पेस्ट कंट्रोलिंग की जाती है। साफ-सफाई के दौरान ही चूहे मिले हैं, जिन्हें अस्पताल परिसर से हटाया जा रहा है।
– डा. केतन मेहरा, जनसंपर्क अधिकारी, एम्स भोपाल।

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