यूनिवर्सिटी में सुरक्षा पर सवाल, हॉस्टल में रहकर चल रहा था कारतूस सप्लाई नेटवर्क

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 मुजफ्फरपुर

बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) के हॉस्टल में रहकर कारतूसों की तस्करी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। काजी मोहम्मदपुर थाने की पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर 200 जिंदा कारतूसों के साथ दो तस्करों को रंगे हाथ दबोचा है। पकड़े गए तस्करों की पहचान सिवान के अभिषेक तिवारी और सीतामढ़ी के अनमोल कुमार के रूप में हुई है।

यूनिवर्सिटी पीजी हॉस्टल में था डेरा
पुलिस की जांच में जो खुलासा हुआ है वह बेहद डराने वाला है। गिरफ्तार दोनों तस्कर यूनिवर्सिटी परिसर स्थित 'पीजी थर्ड' हॉस्टल के कमरा नंबर 54 और 55 में अवैध रूप से रह रहे थे। ये तस्कर विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच छिपकर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। कार्रवाई के दौरान दोनों अपनी बुलेट बाइक से कारतूसों की बड़ी खेप लेकर वापस पीजी थर्ड हॉस्टल ही जा रहे थे, तभी काजी मोहम्मदपुर थानेदार नवलेश कुमार ने टीम के साथ कलमबाग-खबरा रोड पर घेराबंदी कर उन्हें दबोच लिया।

विश्वविद्यालय में तनाव
हॉस्टल से कारतूसों की बरामदगी ने विश्वविद्यालय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में माहौल काफी तनावपूर्ण है। कुलपति (VC) के कुछ फैसलों के खिलाफ छात्र पिछले तीन दिनों से अनशन पर बैठे हैं। हाल ही में कुलपति आवास पर बम फेंकने की घटना भी हुई थी, जिसकी जांच अभी चल ही रही है। ऐसे में हॉस्टल से 200 गोलियों का मिलना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। थानेदार नवलेश कुमार ने बताया कि दोनों के पास से 200 गोलियां बरामद की गई हैं। फिलहाल पुलिस के बयान पर काजी मोहम्मदपुर थाने में
एफआईआर दर्ज की जा रही है।

पुलिस अब इन तस्करों का आपराधिक इतिहास खंगाल रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कारतूसों की यह खेप किसे सप्लाई की जानी थी। क्या इन गोलियों का इस्तेमाल विश्वविद्यालय में चल रहे विरोध प्रदर्शन या कुलपति आवास पर हुए हमले से जुड़ा है, पुलिस इस बिंदु पर भी गंभीरता से जांच कर रही है। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय के आम छात्रों और अभिभावकों में दहशत का माहौल है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बाहरी लोग इतनी आसानी से हॉस्टल के कमरों में अवैध रूप से कैसे रह रहे थे और प्रशासन को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?

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