दो दिवसीय कार्यशाला से शहरी निकायों में तेजी आएगी विकास की, मंत्री विजयवर्गीय करेंगे उद्घाटन

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल

प्रदेश के शहरी निकायों के विकास की गति को तेज करना और उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय 16 अप्रैल, गुरुवार को भौरी स्थित सुंदरलाल पटवा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन मैनेजमेंट (SPNIUM) में दो दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस कार्यशाला का प्राथमिक लक्ष्य नगरीय निकायों में राजस्व संवर्धन, शहरी सुधारों और सतत् वित्तीय प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर गंभीर विचार-विमर्श करना है। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे कार्यशाला में विभागीय सुधारों पर अपना मार्गदर्शन  प्रदान करेंगे।

नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कार्यक्रम की रूपरेखा के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि 16 और 17 अप्रैल को आयोजित होने वाली कार्यशाला के दौरान मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए विषय विशेषज्ञ, अनुभवी अधिकारी और शहरी नियोजन के जानकार अपने नवाचारों और अनुभवों को साझा करेंगे। यह आयोजन प्रदेश के नगरीय निकायों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक प्रभावी मंच सिद्ध होगा।

कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में शहरी सुधार से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इसमें मुख्य रूप से निकायों की खाली भूमि के आर्थिक उपयोग (लैंड मोनेटाइजेशन), शोधित जल (ट्रीटेड वाटर) के पुन: उपयोग की संभावनाओं, संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) संग्रहण में सुधार और लीज रेंट जैसे विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही, कार्यप्रणाली में आधुनिकता और पारदर्शिता लाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) आधारित टूल्स, जैसे यूसीएफ, एईबीएएस और स्पैरो के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी जाएगी, ताकि प्रशासनिक कार्यों को और अधिक सुगम और उत्तरदायी बनाया जा सके।

कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण विभिन्न नगर निकायों द्वारा सफलतापूर्वक अपनाई जा रही सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों (Best Practices) का आदान-प्रदान होगा। इसके माध्यम से अन्य निकायों को सफल आर्थिक और प्रशासनिक मॉडलों को समझने और उन्हें अपने स्थानीय स्तर पर लागू करने में मदद मिलेगी। इससे न केवल निकायों की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि शहरी विकास की परियोजनाओं को भी नई ऊर्जा मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के संवाद से स्थानीय निकायों के राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में मध्यप्रदेश के उन सभी नगरीय निकायों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे जिनकी जनसंख्या एक लाख से अधिक है। इसके साथ ही, विभाग के नवनियुक्त मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMOs) को भी इस आयोजन का हिस्सा बनाया गया है, ताकि वे अपने सेवा काल के शुरुआती दौर में ही शहरी प्रबंधन की आधुनिक बारीकियों और वित्तीय अनुशासन से परिचित हो सकें। यह कार्यशाला प्रदेश के शहरी नियोजन को एक नई ऊंचाई पर ले जाने और 'आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश' के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक सार्थक कदम साबित होगी।

 

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