MP में संविदा कर्मियों के लिए हाईकोर्ट ने दी राहत, 10 साल की सेवा का हक मिलेगा, न्यूनतम वेतन समेत अन्य लाभ होंगे जारी

मध्य प्रदेश राज्य

MP में संविदा कर्मियों को HC से राहत, 10 साल की सेवा का मिलेगा हक, न्यूनतम वेतन और अन्य लाभों से नहीं होंगे वंचित

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: MP में संविदा कर्मियों को मिलेगा 10 साल की सेवा का हक, न्यूनतम वेतन और अन्य लाभ

MP में संविदा कर्मियों के लिए हाईकोर्ट ने दी राहत, 10 साल की सेवा का हक मिलेगा, न्यूनतम वेतन समेत अन्य लाभ होंगे जारी

जबलपुर
मध्य प्रदेश में वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के लिए हाई कोर्ट से बड़ी राहत सामने आई है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने स्पष्ट किया है कि 10 वर्ष से अधिक समय से लगातार सेवाएं दे रहे संविदा, आउटसोर्स और अंशकालिक कर्मचारी वर्गीकरण और उससे जुड़े लाभों के हकदार हैं।

आर्थिक न्याय का अधिकार माना
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि लंबे समय से काम कर रहे इन कर्मचारियों को आर्थिक न्याय और सम्मानजनक जीवन स्तर का अधिकार है। ऐसे में उन्हें नीति के तहत वर्गीकृत किया जाए और उनके पद के अनुरूप न्यूनतम वेतन दिया जाए।

वर्षों से सेवारत कर्मियों की दलील स्वीकार
जबलपुर सहित प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों ने याचिकाएं दायर कर बताया था कि उन्हें वर्ष 2009 में अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया गया था और तब से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान लाभ नहीं दिए जा रहे।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने कर्मचारियों के वर्गीकरण और न्यूनतम वेतन को लेकर नीति बनाई है, लेकिन उसका लाभ उन्हें नहीं मिल रहा।

संवैधानिक अधिकारों का हवाला
याचिकाओं में यह तर्क दिया गया कि नियमितीकरण में भेदभाव हो रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से लेते हुए माना कि पात्र कर्मचारियों को नीति के अनुसार लाभ दिया जाना चाहिए।

सरकार को निर्देश
हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 2016 की नीति के तहत पात्र संविदा कर्मचारियों का वर्गीकरण किया जाए और उन्हें सभी परिणामी लाभ दिए जाएं।

यह फैसला प्रदेश के हजारों संविदा कर्मचारियों के लिए राहतकारी माना जा रहा है, जो लंबे समय से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे थे।

 

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