शराबबंदी हटाने की मांग के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल

राज्य

 पटना

बिहार में बीजेपी के नेतृत्व में सरकार बन गई है जिसके मुखिया सम्राट चौधरी बनाए गए हैं। इसी के साथ नीतीश कुमार की शराबबंदी कानून बहस तेज हो गई है। एनडीए में शामिल उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा(आरएलएम)के विधायक माधव आनंद ने इस कानून को राज्य के लिए नुकसानदायक बताते हुए समीक्षा करके समाप्त करने की मांग की है। गुरुवार को सीएम सम्राट चौधरी से मिलकर लौटे माधव आनंद मीडिया कर्मियों से बात की और कहा कि उनसे बिहार की जनता को काफी उम्मीदे हैं। वे बिहार नाम वैश्विक स्तर पर ले जाएंगे।

बिहार में बीस साल पुराने नीतीश युग का अंत हो गया। इसके साथ ही उनके फैसलों पर चर्चा शुरू हो गई। पूर्ण शराबबंदी नीतीश कुमार का बहुत बड़ा क्रांतिकारी और कदम है। नीतीश कुमार सीएम पद से हटते ही शराबबंदी पर सत्ता पक्ष की ओर से ही सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के मधुबनी विधायक सीएम से मिलने उनके सरकारी आवास पर पहुंचे। बाहर निकले तो काफी प्रसन्न मुद्रा में दिखे। उन्होंने कहा कि सीएम शपथ लेने के साथ ही ऐक्टिव हैं। लोगों से मिल रहे हैं। शराबबंदी के सवाल पर माधव आनंद ने क्रांतिकारी बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में शराबबंदी कानून की कोई आवश्यकता नहीं है। इससे राजस्व की हानि हो रही है। उन्होंने कहा कि सदन में ही नीतीश कुमार के सामने शराबबंदी की समीक्षा की मांग की थी। अर्थशास्त्री होने के नाते आज फिर से कह रहा हूं कि बिहार में शराबबंदी की कोई जरूरत नहीं है बल्कि, जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि शरबबंदी कोई समाधान नहीं हो सकता। बिहार को राजस्व का बहुत नुकसान हो रहा है। बिहार को विकसित बनाने के लिए फंड की आवश्यकता है जिसकी कमी महसूस की जाती है। हमारे राज्य का राजस्व दूसरे राज्यों और देशों में जा रहा है। शराबबंदी नीतीश कुमार की ऐतिहासिक पहल थी। इसके दस साल हो गए। अब इसकी समीक्षा होनी चाहिए। इसकी बिहार जैसे राज्य में कोई जरूरत नहीं है जहां राजस्व की बहुत अधिक जरूरत है।

माधव आनंद ने कहा कि जागरुकता और जानकारी बढ़ेगी तो लोग खुद नशे से दूर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बिहार के विकास के लिए तेजी से काम करेगी और प्रदेश काफी तरक्की करेगा। नीतीश कुमार ने जो खाका खींचा उसे वर्तमान सरकार आगे बढ़ाएगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलेरेंस की नीति जारी रहेगी। बिहार अब इतिहास रचेगा। विकसित भारत और विकसित बिहार की परिकल्पना जरूर साकार होगी। हालांकि, सम्राट चौधरी पहले ही शराबंदी कानून को लागू रखने की बात कह चुके हैं।

बिहार में 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है। इस दौरान करोड़ों लीटर शराब जब्त किए गए और लाखों लोगों को जेल भेजा गया। लेकिन, जहरीली शराब से बड़ी संख्या में लोग मारे गए और राज्य में अपराध का एक नया नेटवर्क शराब के अवैध कारोबार की वजह से तैयार हो गया।

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