IMF का बड़ा बयान: भारत की वृद्धि दोगुनी, पाकिस्तान को कर्ज देने वाली संस्था ने उठाए सवाल

दुनिया

नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के बाद भी भारत की ग्रोथ का IMF यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष अनुमान लगा चुका है। अब इसकी प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जीवा ने भारत की नीतियों की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि भारत दोगुनी तेजी से आगे बढ़ रहा है। खास बात है कि पाकिस्तान लगातार IMF से कर्ज ले रहा है।

IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर जॉर्जीवा ने कहा, 'आज के भारत को देखिए। भारत की विकास दर दुनिया की औसत विकास दर से दो गुनी से भी अधिक है।' उन्होंने कहा, 'ऐसा इसलिए हो सका, क्योंकि फंडामेंटल्स या बुनियाद मजबूत है।'

भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ने का अनुमान
पीटीआई भाषा के अनुसार, IMF ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था वर्ष 2026 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। 'वैश्विक आर्थिक परिदृश्य' रिपोर्ट में यह अनुमान जताते हुए कहा कि इस साल 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

मुद्राकोष ने भारत के संदर्भ में कहा, 'वर्ष 2026 के लिए वृद्धि अनुमान में 0.3 प्रतिशत अंक की हल्की बढ़ोतरी की गई है। इसके पीछे 2025 के मजबूत प्रदर्शन का असर और भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किए जाने जैसे कारक हैं। इन कारकों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया है।'

इसके साथ ही मुद्राकोष ने वर्ष 2027 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के 6.5 प्रतिशत पर बने रहने का अनुमान जताया। साथ ही आईएमएफ ने 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जो 2025 के अनुमानित 3.4 प्रतिशत से कम है।

पाकिस्तान को मिली सऊदी अरब से मदद
सऊदी अरब ने पाकिस्तान को तीन अरब अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने का वादा किया है। इसी के साथ मौजूदा पांच अरब अमेरिकी डॉलर के कर्ज के पुनर्भुगतान की मियाद भी और तीन साल के लिए बढ़ा दी है। पाकिस्तान को यह मदद ऐसे समय में मिली है जब वह इस महीने UAE को 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर चुकाने की तैयारी कर रहा है, जिसकी वजह से उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ गया है।

IMF ने शर्त लगाई है कि पाकिस्तान के तीन प्रमुख द्विपक्षीय ऋणदाताओं (सऊदी अरब, चीन और यूएई) को मौजूदा तीन साल के कार्यक्रम के पूरा होने तक देश के साथ अपनी नकद जमा राशि बनाए रखनी होगी।

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