विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा कदम, हर कॉलेज में काउंसलर जरूरी
मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश
स्टॉफ प्रशिक्षण, अभिभावक जागरुकता और मेंटर प्रणाली भी होगी लागू
भोपाल
विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुपालन में जारी इन निर्देशों के अंतर्गत अब सभी शैक्षणिक संस्थानों में काउंसलर की नियुक्ति के साथ कई अन्य व्यवस्थाएं भी अनिवार्य कर दी गई हैं। जारी निर्देशों के अनुसार, जिन संस्थानों में 100 या उससे अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, वहां कम से कम एक प्रशिक्षित काउंसलर की नियुक्ति करना अनिवार्य होगा। कम छात्र संख्या वाले संस्थानों को बाहरी विशेषज्ञों से जुडकर काउंसलिंग व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। काउंसलर के रूप में मनोविज्ञान में स्नातकोतर, प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक, सामाजिक कार्य विशेषज्ञ या संबंधित क्षेत्र के अनुभवी व्यक्ति नियुक्त किए जा सकेंगे।
संस्थान में केवल काउंसलर नियुक्ति पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे संस्थान को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से सभी शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों, प्रशासनिक स्टॉफ और सुरक्षा कर्मियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षणों में मानसिक स्वास्थ्य, प्राथमिक सहायता, विद्यार्थी के व्यवहार में आए परिवर्तनों की पहचान तथा जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने जैसे विषय शामिल होंगे। साथ ही विद्यार्थियों के अभिभावकों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ने पर जोर दिया गया है। संस्थानों को निर्देश दिए गए है कि वे अभिभावकों के लिए नियमित जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें, जिससे वे अपने बच्चों के व्यवहार में आने वाले परिवर्तनों को समझ सके और समय रहते उचित सहयोग प्रदान कर सकें।
विद्यार्थियों की व्यक्तिगत निगरानी और मार्गदर्शन के लिए 25 से 40 छात्रों पर एक मैंटर नियुक्त किया जाएगा। यह मेंटर विद्यार्थियों की उपस्थिति, शैक्षणिक प्रदर्शन, व्यवहार और मानसिक स्थिति पर नजर रखेगा तथा आवश्यकता पड़ने पर परामर्श और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा। साथ ही अभिआवकों से संपर्क बनाए रखते हुए विद्यार्थियों के समग्र विकास में सहयोग करेगा। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी संस्थानों को निर्देशित किया है कि इन व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर लागू करते हुए निर्धारित प्रारूप में जानकारी विभाग को शीघ्र प्रेषित करें।
मॅटोर-मॅटी (गार्जियन ट्यूटर) व्यवस्था
प्रत्येक संस्थान द्वारा 25-40 विद्यार्थियों पर एक मेंटर की नियुक्ती की जाएगी। यह दायित्व किसी प्राध्यापक को दिया जाएगा, जिसे सौंपी गई जिम्मेदारियों का निर्वाह करना होगा। मेंटर विद्यार्थियों की उपस्थिति, परीक्षा परिणाम और व्यवहार की निगरानी और कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनका मार्गदर्शन करेंगे। मानसिक तनाव व व्यक्तिगत समस्याओं में सहयोग करना। अभिभावकों से नियमित संपर्क बनाए रखना। कैरियर मार्गदर्शन एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये प्रेरित करना। सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में विद्यार्थिों की सहभागिता बढ़ाना। विद्यार्थियों के रिकॉर्ड व काउंसलिंग रजिस्टर का संधारण करना होगा।
संस्थाओं में प्रदर्शित से होंगे हेल्पलाइन नंबर परिसर में प्रमुख स्थानों पर वॉल पेटिंग से हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित किए जाएंगे।
Dial-112
Tele-MANAS-14416
उमंग हेल्पलाइन 14425
उच्च शिक्षा विभाग की विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी सुश्री ऊषा नायर ने कहा, विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। काउंसलर नियुक्ति के साथ स्टॉफ प्रशिक्षण, अभिभावक सहभागिता और मेंटर प्रणाली को लागू कर हम एक सुरक्षित और सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन निर्देशों के क्रियान्वयन की सतत निगरानी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर संस्थानों को हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। यह पहल विद्यार्थियों के मानसिक संतुलन और समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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